हापुड़। जिले के 45 हजार आलू उत्पादक किसानों पर शीतगृहों के बढ़े किराए की मार पड़ी है। स्थानीय कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ने सामान्य और शुगर फ्री आलू के भंडारण में पांच रुपये से 15 रुपये/क्विंंटल की बढ़ोतरी की है। अब भंडारण शुल्क 270 से 300 रुपये/क्विंटल देना होगा। जबकि बाजार में हाईब्रिड आलू महज 350 रुपये और चिप्सोना 500 रुपये कट्टा बिक रहा था।
पिछले साल आलू की फसल से किसानों को काफी नुकसान रहा। दाम गिरने से किराया चुकाना भी मुश्किल हो गया। पिछले साल भी शीतगृहों का किराया बढ़ाया गया था। लेकिन किसानों के हंगामे के बाद इसमें कुछ कटौती कर दी गई थी। लगातार बिजली, मजदूरी समेत खर्च बढ़ने पर शीतगृह एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक कर भंडारण शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है।
इन दिनों हाईब्रिड आलू का कट्टा सिर्फ 300 रुपये और चिप्सोना आलू का कट्टा 500 रुपये/कट्टा तक ही बिक रहा है। फसल बंपर होने के आसार हैं, क्योंकि इस बार पाले का असर फसल पर अधिक नहीं रहा। ऐसे में दाम नहीं बढ़े तो किसानों को भंडारण शुल्क चुकाना मुश्किल होगा।
बहरहाल, एसोसिएशन की बैठक में सामान्य आलू के भंडारण का शुल्क 270 रुपये और शुगर फ्री आलू का भंडारण शुल्क 300 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। जबकि पिछले साल सामान्य आलू का किराया 265 और शुगर फ्री आलू का भंडारण शुल्क 270 रुपये प्रति क्विंटल था।
एक बीघा आलू तैयार करने में आने वाले खर्च का हिसाब-
जिले में एक बीघा में औसतन 40 कट्टा आलू निकलता है। इसमें बीज, दवा पानी पर करीब छह हजार का खर्च आता है। इसके बाद खोदाई के दौरान 40 कट्टों का बारदाना करीब 440 रुपये में आता है, खोदाई का करीब 500 रुपये ट्रैक्टर वाले को जाता है, 40 कट्टों पर मजदूरी और पल्लेदारी करीब 800 रुपये आती है, शीतगृह तक इन कट्टों को ले जाने का खर्च करीब 400 रुपये आता है, 40 कट्टों का भंडारण शुल्क छह हजार बनता है। कुल खर्च करीब 14 हजार आता है, बाजार में दाम 300 रुपये/कट्टा है, इन्हें बेचने पर सिर्फ 10 हजार मिलेंगे। जिसमें मंडी में आढ़त भी ली जाती है, एक बीघा में ही किसान को चार हजार रुपये तक का नुकसान होगा। - राधेलाल त्यागी, आलू किसान।
जिले में शीतगृहों और आलू की स्थिति
शीतगृहों की संख्या18
स्टोरेज क्षमता1.80 लाख मिट्रिक टन
जिले में औसत उत्पादन-1.90 लाख मिट्रिक टन
जिले में आलू भंडारण के किराए की स्थिति-
आलू वर्तमान दाम पहले दाम
सामान्य आलू 270 रुपये 265 रुपये
शुगर फ्री 300 रुपये 285 रुपये
(नोट : किराया रुपये/क्विंटल में है)
खर्च बढ़ने के कारण बढ़ाया शुल्क
शीतगृहों को चलाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। मजदूरी, बिजली व अन्य संसाधन बहुत महंगे हो गए हैं, एसोसिएशन की बैठक कर सिर्फ पांच से साढ़े सात रुपये बैग (50 किलो) बढ़ाया है। - संजय कृपाल, अध्यक्ष शीतगृह एसोसिएशन।