फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hamirpur News: जिला अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकियां, 18 माह से नहीं हुई सफाई

Sun, 04 Jan 2026 12:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
विज्ञापन
फोटो 03 एचएएमपी 18- जिला अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकी में अंकित सफाई की तिथि। संवाद
विज्ञापन
हमीरपुर। जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों सहित स्वास्थ्य कर्मियों को दूषित पानी पिलाया जा रहा है। ये इन टंकियों की कराई गई सफाई की तिथि बता रही है। जून 2024 से इन टंकियाें की साफ-सफाई नहीं कराई गई है। जिम्मेदार भी गोलमोल जवाब देते नजर आए। जबकि अभी हाल ही में इंदौर में पानी की टंकी का दूषित पानी पीने से 15 लाेगों की मौत हो गई थीं, इसके बाद भी जिला प्रशासन इनपर ध्यान नहीं दे रहा है।
विज्ञापन


जिला अस्पताल में पेयजल व्यवस्था के लिए छत पर पानी की छह से अधिक टंकियां रखी हैं। इनकी हर छह माह में साफ-सफाई कराई जाती है। लेकिन, विभाग की लापरवाही के चलते 18 माह बाद भी इनकी साफ-सफाई नहीं कराई गई है। इससे इन टंकियों का पानी दूषित रहता है। मरीजों व तीमारदारों को यही पानी उपयोग करना पड़ रहा है। इससे लोगों को संक्रमण का खतरा बना रहता है। छत पर रखी एक-एक हजार लीटर की टंकियों की सफाई एक जून 2024 को कराई गई थीं। इनकी अगली सफाई एक दिसंबर 2024 को होनी थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने 18 माह बाद भी इसकी सफाई नहीं कराई है। इससे इनका पानी पीने योग्य नहीं है।

सीएमएस डॉ. एसपी गुप्ता ने बताया कि जांच कर तत्काल टंकियों की सफाई कराई जाएगी। साथ ही दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-


16 माह से दो ओवरहेड टैंकों की नहीं की गई सफाई

कुरारा। कस्बा में करोड़ों लागत से जल संस्थान की पेयजल योजना संचालित है। इसके तहत कस्बा में दो ओवरहेड टैंकों से करीब 10 हजार की आबादी का पेयजल आपूर्ति की जाती है। लेकिन, 16 माह बाद भी इनकी साफ-सफाई नहीं कराई गई है।
विज्ञापन

शुरुआती दौर में क्षेत्र के मलहरा, जखेला, कुसौली पुरवा, डामर, सरसई, झलोखर, रिठारी, चकोठी, जल्ला सहित कस्बा को पेयजल आपूर्ति की जाती थी] लेकिन कुछ वर्षों से ग्रामीणों को जल संस्थान ने एकल पेयजल योजना से इन गांवों को जोड़ा है। इससे अब जल संस्थान की पेयजल आपूर्ति कस्बा तक ही सीमित रह गई है। दो टंकी बनाई गई हैं, इनकी सफाई 5 सितंबर 2024 से नहीं कराई गई है। इससे टंकी में काई लगने लगी है।

कस्बा निवासी समाजसेवी सुधेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मियों में ऊंचाई वाले वार्डों में जल संस्थान पानी मुहैया कराने में नाकाम साबित होता है। जल संस्थान में जनरेटर न होने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमराने से दो-दो दिन तक कस्बावासियों को पानी के लिए जूझना पड़ता है। एक एक साल बीतने के बाद भी इन टंकियों की सफाई न होने से संक्रामक बीमारियों के खतरा फैलने का डर सताता रहता है।





पानी में बदबू, नलों से निकलते हैं चिड़ियों के पंख
-14 साल से ओवरहेड टैंक की नहीं हुई सफाई

मुस्करा। कस्बा के चार थोक रामलीला मैदान के पास स्थित करीब 50 वर्ष पुरानी जल संस्थान की 7,080 लीटर (250 क्यूसेक लीटर) क्षमता की टंकी जर्जर हालत में संचालित है। इससे कस्बा की करीब 10 हजार की आबादी को पेयजल मुहैया कराया जाता है। साल 2011 के बाद इसमें साफ-सफाई नहीं करायी गई। लोगों का कहना है कि पानी में अजीब सी दुर्गंध आती है। इसका स्वाद भी ठीक नहीं है, लेकिन मजबूरन इसी को पीना पड़ता है।
चार थोक मोहल्ला निवासी प्रमोद अग्रवाल, मन्नीलाल अहिरवार, रामविशाल शुक्ला, केशव प्रसाद द्विवेदी, योगेश, अनूप दीक्षित आदि लोगों ने बताया कि कस्बे में इसी पुरानी टंकी से पेयजल आपूर्ति होती है। कई वर्षों पहले पानी का स्वाद बहुत अच्छा था, लेकिन इस समय अजीब स्वाद और महक पानी में आती है। कई वर्षों से पानी की टंकी की सफाई तक नहीं करायी गई है। सफाई के नाम पर ब्लीचिंग पावडर डाल दिया जाता है। टंकी के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि उनके नल से पानी के साथ चिड़ियों के पंख निकल कर आते हैं।





जर्जर हालत में खड़ी है टंकी

टंकी की हालत जर्जर है। इसकी सीढ़ियों की रेलिंग जगह-जगह टूट चुकी है। कई जगह से टंकी का कंक्रीट भी गिरने लगा है। टंकी की सफाई की आखिरी दिनांक 27 जनवरी 2011 अंकित है। जल संस्थान के अधिकारी इन सवालों के जवाब में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इससे कभी यह जमींदोज हो सकती है।





सीढ़ी टूटी, कैसे हो टंकी की सफाई

ऑपरेटर इदरीस ने बताया कि पानी की टंकी की सफाई नहीं हो पाती है। टंकी के ऊपर की आखिरी सीढ़ी टूटकर जर्जर हो गई है। इसके चलते टंकी के ऊपर पहुंचना और टंकी में उतरकर सफाई करने में जान का जोखिम है। दो-तीन माह में एक बार सप्लाई के साथ ब्लीचिंग पावडर छोड़ दिया जाता है।
-



टंकी की सफाई तो नहीं हो पाती है, लेकिन ब्लीचिंग पावडर सप्लाई के साथ छोड़ दिया जाता है। उच्चाधिकारियों से इस मामले में बात करेंगें।
- आशीष कुमार, जेई जल संस्थान

फोटो 03 एचएएमपी 18- जिला अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकी में अंकित सफाई की तिथि। संवाद

फोटो 03 एचएएमपी 18- जिला अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकी में अंकित सफाई की तिथि। संवाद

फोटो 03 एचएएमपी 18- जिला अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकी में अंकित सफाई की तिथि। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें