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पीड़ित परिवार को मिले एक करोड़ मुआवजा व नौकरी : चंद्रशेखर

Sun, 25 Aug 2024 11:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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हमीरपुर। आजाद समाज पार्टी के मुखिया व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के जनपद आगमन पर जिले भर में अलग-अलग स्थानों पर स्वागत किया गया।
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उन्होंने 12 अगस्त को पतारा गांव में हुई किसान छोटेलाल प्रजापति की हत्या के मामले में परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। साथ ही पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा व नौकरी देने की मांग उठाई। उन्होंने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा कि उप्र सरकार गुुंडों का समर्थन कर रही है।
चंद्रशेखर आजाद ने किसान हत्याकांड पर कहा कि पुलिस मामले में पहले कार्रवाई करती तो छोटेलाल प्रजापति की जान न जाती। उन्होंने रो रही छोटेलाल की पत्नी राधा का हाथ पकड़कर कहा कि वह 24 घंटे उनके लिए उपलब्ध हैं। उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। सांसद ने कहा कि पतारा गांव में करीब 70 फीसदी कच्चे मकान हैं। जहां लोगों को पक्की छत तक नहीं मिली है।
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पीड़ित परिवार के घर के दरवाजे में झुककर दाखिल हुए और एसडीएम पवन पाठक से कहा कि आपको यह लोग आवास के लिए पात्र नहीं लगे। अगर घटना न होती तो इनको आवास न मिलता। वहीं लोग इस दौरान गांव में उनको खरपैल में चढ़कर देखते नजर आए। कई थानों का फोर्स तैनात रहा। इस दौरान एसडीएम पवन पाठक व सीओ राजेश कमल मौजूद रहे।
उधर, पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि कुरारा थाने के एक गांव में पूर्व में हुए दुष्कर्म के मामले में भी कुरारा थाना प्रभारी ने अच्छा व्यवहार नहीं किया। कहा कि तहरीर तक फाड़ दी गई थी।
इस पर उन्होंने थानाध्यक्ष को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार आपको शोभा नहीं देता है। ये जो वर्दी और अशोक चिह्न है यह गर्व के लिए है। आप पर ऐसे आरोप नहीं लगने चाहिए।

पीड़ित परिवार ने तीन नाम और दिए
सांसद से मिलने पर पीड़ित परिवार ने हत्याकांड में शामिल तीन और लोगों के नाम पुलिस को दिए हैं। जिसको लेकर सांसद ने सीओ के फोन एसपी दीक्षा शर्मा से बात कर कहा कि जिनके लोगों के नाम दिए गए हैं, उन पर भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चौकी में स्टाफ तैनात किए जाने की बात कही। वहीं एसपी ने बताया कि बीट सिपाही और पीआरवी कर्मियों को वहां से हटा दिया गया है।
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सांसद बोले-पार्लियामेंट बड़ी है
सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण के उपवर्गीकरण के फैसले को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। कहा कि क्या उन्होंने पहले कभी अपने फैसले वापस नहीं लिए, उन्हीं में से एक जज ने उपवर्गीकरण का विरोध भी किया है। पार्लियामेंट बड़ी है सुप्रीम कोर्ट छोटा है। जनता के पैसे से सुप्रीम कोर्ट के जजों को तनख्वाह मिलती है।
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