हमीरपुर। कुंडौरा की 55 वर्षीय रामरती फाइलेरिया की दवा लेकर घर पहुंची टीम को देखकर अपनी गलती का एहसास करते हुए बोल उठी कि काश उसने दवा खानी न छोड़ी होती तो आज फाइलेरिया रोग से नहीं जूझती। हालांकि फाइलेरिया का असर होने के बाद से लगातार दवा खाने की वजह से रामरती के दाहिने पैर की सूजन स्थिर हो गई है। बगैर किसी हिचकिचाहट के दवा खाने वाली रामरती ने अपने पड़ोस में रहने वालों को भी दवा खाने को प्रेरित किया।
रामरती ने बताया कि उसके दाहिने पैर में फाइलेरिया का असर है। सूजन आ गई है। आज से दस साल पूर्व फाइलेरिया की दवा न खाने की वजह से उसे जो दिक्कत हुई थी वह शरीर में फाइलेरिया के बैक्टीरिया की मौजूदगी के कारण हुई थी। उस वक्त वह पूरी तरह से स्वस्थ थी, अगर उसी दिन से लगातार दवा खाती तो आज यह नौबत नहीं आती। हालांकि फाइलेरिया होने के बाद से रामरती के लगातार दवा खाने की वजह से उसके पैर की सूजन स्थिर हो गई है, जिससे उसे चलने-फिरने में दिक्कत नहीं होती है। रामरती ने टीम के सामने ही अपने पड़ोसियों को भी फाइलेरिया की दवा खाने को प्रेरित किया।
6.01 लाख लोगों ने खाई फाइलेरिया की दवा
जिला मलेरिया अधिकारी आरके यादव ने बताया कि 22 नवंबर से शुरू हुए फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में अभी तक 6.01 लाख लोगों को दवा खिलाई जा चुकी है। आम जनमानस भी अभियान में सहयोग कर रहा है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एके रावत ने भी लोगों से फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए दवा खाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया बीमारी से बचने का यही एकमात्र उपाय है कि लोग दवा खाएं, खुद भी बचें और अपने परिवार को बचाएं।
अधिकारियों ने अभियान का जायजा लिया
फाइलेरिया उन्मूलन अभियान जोरशोर से चल रहा है। प्रतिदिन टीमें घर-घर जाकर दो साल से ऊपर के सभी लोगों को अपनी मौजूदगी में फाइलेरिया से बचाव की दवा खिला रही हैं। बुधवार को सुमेरपुर ब्लाक के कुंडौरा गांव में जिला मलेरिया अधिकारी आरके यादव, विश्व स्वास्थ्य संगठन के चित्रकूटधाम के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ.राहुल और पीसीआई के जिला समन्वयक प्रेम सिंह कटियार अभियान का जायजा लेने पहुंचे। टीम के साथ गांव में कुछ घरों में जाकर लोगों को दवा के फायदे बताते हुए उन्हें दवा खाने को प्रेरित भी किया। इसी दौरान टीम कुंडौरा गांव की रामरती के दरवाजे पहुंची।