राठ (हमीरपुर)। कभी गोरक्षा के लिए स्वामी ब्रह्मानंद महाराज ने संतों के साथ संसद में घुसने का प्रयास किया तो पुलिस ने संतों की पिटाई कर दी और अंदर जाने से रोक दिया। इस पर स्वामी ब्रह्मानंद व्यथित हुए और प्रतिज्ञा ली कि अब वह संसद में वैधानिक रूप से ही प्रवेश करेंगे। वह लगातार दो बार सांसद रहे और अपने परिवार से दूरी बनाए रहे। उसने पास कोई निजी कोई संपत्ति नहीं रही। जो कुछ भी किया सब जनता जनार्दन के लिए कर गए।
सांसद ब्रह्मानंद ने जीवन भर द्रव्य (रुपया-पैसा) को हाथ से नहीं छुआ। सांसद रहते जो मिला सब दान कर कर दिया। यहां तक कि सदस्यता समाप्त होने के बाद जो पेंशन मिली उसे भी समाज को दान कर दी। स्वामी ब्रह्मानंद ने 1938 में ब्रह्मानंद इंटर कालेज, 1943 में संस्कृत महाविद्यालय और 1960 में ब्रह्मानंद कृषि महाविद्यालय की स्थापना की। इस पिछड़े भूभाग में शिक्षा की ज्योति जलाई। इन शिक्षण संस्थाओं में भी परिवार को दूर रखा। वह पहले गेरूवा वस्त्रधारी सांसद थे। उनका उद्देश्य शिक्षा के साथ रोजगार उपलब्ध कराना था। बीएनवी डिग्री कालेज में कृषि परास्नातक की कक्षाएं संचालित हैं। जहां देश के विभिन्न प्रांतों के छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। शोध कार्य के लिए छात्रों को झांसी व बांदा विश्वविद्यालयों का रुख करना पड़ता है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के चलते काफी समय से बीएनवी डिग्री कालेज को यूनिवर्सिटी बनाने की मांग उठाई जा रही है। यूनिवर्सिटी बनने से छात्रों को लाभ होगा। साथ ही किसानों को नई तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय बनाने का आश्वासन देकर जनता की उम्मींदो को बल दिया है।