फोटो 18 एचएएमपी 07-महिला आयोग की सदस्य के साथ माधुरी। संवाद
हमीरपुर। कंधौली गांव की माधुरी ने गरीबी से कभी हार नहीं मानी, बल्कि डटकर मुकाबला किया। मेहनत मजदूरी की तो आज सपने साकार हो रहे हैं। स्वयं तो ठेकेदारी कर ही रहीं हैं बेटे को भी किसानी में ढाल दिया। कंधौली गांव के लखनलाल ने महाराष्ट्र के अमरावती जिला के सिराड़ा गांव की माधुरी से कानूनी तरीके से विवाह किया। आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। किसी तरह घर चल रहा था। पति का साथ देने के लिए माधुरी ने भी घर की देहरी लांघ कर मजदूरी करने में कोई संकोच नहीं किया। मजदूरी में जो काम मिला उसे किया। दिहाड़ी मजदूरी करके बच्चों की भी परवरिश की। माधुरी बताती हैं कि जब वह मजदूरी करती थीं तो ठेकेदार कई मजदूरों से अभद्रता से बात करता था, तभी ठान लिया कि वह ठेकेदार बनकर मजदूरों को सम्मान देगी।
मजदूरी छोड़कर माधुरी ने क्षेत्र में निर्माण कार्य से लेकर अन्य कार्यों में मजदूरों की उपलब्धता कराने का ठेका लेना शुरू कर दिया। उसकी पहचान अब सफल ठेकेदारों में होने लगी है। इस दौरान पति की मौत हो गई, लेकिन माधुरी अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहीं। आज वह 15 से 20 मजदूरों को सम्मान के साथ काम दिलाती हैं और स्वयं भी प्रतिमाह 20 हजार रुपये कमाती हैं।
तीन बेटा व तीन बेटियां की परवरिश में भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। बड़ा बेटा अनमोल खेती कर रहा और ट्रैक्टर भी खरीद लिया। महिला आयोग की सदस्य ने बीते दिनों आयोजित कार्यक्रम में माधुरी को सशक्त नारी का सम्मान भी दिया। आज उनके सभी सपने साकार हैं।