हमीरपुर। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम गीतांजलि गर्ग की अदालत ने दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पति को एक साल की सजा और दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं सास व ससुर को 75 -75 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र पर छोड़े जाने का आदेश दिया है। मामला छह साल पुराना है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनीराम बुंदेला ने बताया कि सुमेरपुर कस्बा निवासी श्रीराम प्रजापति ने पुत्री रानी की शादी 11 नवंबर 2013 को मौदहा कस्बा के उपरौस मोहल्ले में सुनील के साथ की थी। बताया कि पीड़िता के ससुराल पहुंचते ही पति सुनील, सास शकुंतला, ससुर रामपाल व देवर प्रिंसू दहेज में कार का दबाव बनाने लगा। आए दिन रानी को मारपीट कर प्रताड़ित किया जाता था। उसने दामाद व समधी से कई बार बात की, लेकिन कुछ असर नहीं हुआ। इस पर बेटी को घर ले आया।
आरोप है कि उसकी गैर मौजूदगी में तीन अक्तूबर 2014 को दामाद, सास, ससुुर व देवर घर आए और उनकी पुत्री को देवी मंदिर के दर्शन कराने के बहाने ले जाकर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। बाद में घायल अवस्था में झामू कुआं के पास रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था।
होश आने पर रानी किसी तरह वहां से बचकर घर आई। पीड़ित पिता ने चार अक्तूबर 2014 को थाना मौदहा में तहरीर दी। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने रानी के पति, सास व ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व घातक हमले का मुकदमा दर्ज किया था। सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम गीतांजलि गर्ग ने सुनील को दहेज उत्पीड़न का दोषी मानते हुए एक वर्ष की जेल व दस हजार जुर्माना सुनाई है। वहीं सास व ससुर को 75-75 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र छोड़े जाने का आदेश दिया है।