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फोन पर जानिए कीटों से फसल को बचाने के तरीके

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हमीरपुर। अप्रैल से अब तक 104 किसानों ने घर बैठे फसलों में लगने वाले कीटों के बारे में फोन पर बताकर बचाव की जानकारी हासिल की है। कृषि विशेषज्ञों की टीम उन्हें जानकारी देती है।
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कृषि रक्षा सहायक घनश्याम वर्मा ने बताया कि सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के जरिए कोई भी किसान फसल में लगने वाले कीटों के बारे में बताकर कृषि विशेषज्ञ से जानकारी हासिल कर सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर 9452247111 अथवा 9452257111 पर सूचना देनी होगी। सूचना के बाद कृषि विशेषज्ञ कीट से बचाव के लिए जरूरी दवाएं और उनके छिड़काव का तरीका बताएंगे। इस समय गेहूं में दीमक और पीली गेरुई का प्रकोप है। इसके लगने पर पौधा सूखने लगता है, ये कीट जड़ को खा जाते हैं। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। इससे बचाव के लिए क्लोरोपाइरीफास 25 ईसी की ढाई लीटर मात्रा 600 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। सिंचाई के पानी के साथ भी इसका प्रयोग कर सकते हैं। वहीं सरसों में माहो कीट अथवा अल्टर नेरिया का खतरा है। इसमें कीट पत्तियों के रस को चूस लेते हैं। पत्तियों में धब्बे पड़ जाते हैं। इससे बचाव के लिए क्यूनाल फास या एजाडिरेक्टिंग .15 प्रतिशत की ढाई लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। चना, मटर, मसूर में फली भेदक कीट रोग का खतरा है। इसके लिए क्यूनालफास या एजाडिरेक्टिंग की ढाई लीटर मात्रा 600 लीटर पानी में घोल छिड़काव करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए कृषि विशेषज्ञों से संपर्क किया जा सकता है।
अधिकारी बोले
सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली की सुविधा का कोई भी किसान लाभ उठा सकता है। फसल में लगने वाले कीट रोगों का लक्षण बताकर निदान की जानकारी हासिल की जा सकती है।
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- डॉ. सरस कुमार तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
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