हमीरपुर। जिले में दिवाली का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया गया। गणेश-लक्ष्मी पूजा कर लोगों ने समृद्धि की कामना की और दीये जलाए। व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर बही का पूजन कराया। मौनियों ने यमुना में डुबकी लगाई, फिर शिव मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की।
जिले में दिवाली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्तिक अमावस्या के अवसर पर सुबह लोगों ने यमुना, बेतवा सहित विभिन्न नदियों में डुबकियां लगाई। मौन चराने वाले लोग मोर पंखों के साथ नदियों पर पहुंचे। जहां स्नान करने के साथ मोरपंखों को भी शुद्ध करने के लिए उनको भी नदी की जलधारा में धुला। इसके बाद मौनियों ने नदी किनारे स्थित पातालेश्वर मंदिर व सिंहमहेश्वर मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना की। शहर समेत सिकरी, बिदोखरपुरई, इंगोहटा, कलौलीतीर, पौथिया, सहुरापुर, शीतलपुर, बदनपुर आदि गांवों के लोगों ने यमुना नदी में डुबकी लगाकर शिवमंदिरों में जलाभिषेक किया। इसके बाद टोलियां बनाकर मौनियां अपने घरों को वापस गए।
दिवाली पर्व पर गौधूलि बेला के समय श्रीगणेश लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। वहीं व्यापारियों ने अपने अभिलेख, खाताबही, बसनों का पूजा अर्चन कराया। इसके साथ ही लोगों में दीपक जलाकर जहां घरो को सजाया। वहीं झालरो से भी घरों को सजाया गया। जो शाम होते ही दमकते हुए नजर आए। इस मौके पर दीवारी नृत्य कलाकारों ने भी करतब दिखाए। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों ने त्योहार पर मवेशियों को नहला धुलाकर रंगों से सजाया गया है।
गोपूजन के बाद टूटेगा मौनियों का व्रत
भरुआसुमेरपुर। नदी सरोवरों में स्नान करने के बाद मोरपंख धुलने के उपरांत मौन चराने वाले मौनियों का 24 घंटे का व्रत शुरू हो गया। यह व्रत अब शुक्रवार शाम गोपूजन के साथ समाप्त होगा। दिवाली पर्व की परंपराओं के साथ श्रीकृष्ण की भक्ति के महासंग्राम का यह पर्व श्रद्धा एवं उत्साह के साथ शुरू हो गया। मौनव्रत धारण कर दिन भर जंगलों में बने देवस्थलों में जाकर पूजा अर्चन कर प्रसाद चढ़ाने के साथ शाम को गोपूजन के साथ व्रत को तोड़ेंगे।
किसी ने झालरों से तो किसी ने रंगोली बनाकर सजाएं मकान
मौदहा। दिवाली पर जहां घरों में सफाई पुताई के साथ बिजली की झालरों से जगमगाया गया है। वहीं गरीब की कच्ची झोपड़ी व उसके आंगन व चबूतरे मिट्टी, गेरू व गोबर के रंगों से ऐसी रंगोलियां बनाई है जो मन को मोह रही है। बड़ी-बड़ी हवेलियों में बिजली की झालरों की शानदार सजावटों के बीच कच्चे गरीब तबके के मकानों को रंगोलियों से सजाया गया है। यह रंगोली अपने आप में एक ऐसा आकर्षण केंद्र हैं। जो वास्तव में प्रदूषण रहित खुशियों व हौसलों के रंग बिखेर रहे हैं। गांवों की गलियां व गरीब बस्तियां ऐसे ही कलाओं से सजी हुईं हैं। (संवाद)