फोटो 13 एचएएमपी 06- मृतक रामकिशोर की फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
मौदहा (हमीरपुर)। रपटे पर पैर फिसलने से श्यामा नाला में गिरे 12 वर्षीय बेटे को पिता ने बचा लिया लेकिन खुद तेज बहाव की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठा। एनडीआरएफ की टीम को करीब 20 घंटे बाद उसका शव घटनास्थल से 500 मीटर दूर झांड़ियों में फंसा मिला। हादसे में परिजन में चीख-पुकार मच गई।
कोतवाली क्षेत्र के उरदना गांव निवासी रामकिशोर उर्फ डगरु (45) शनिवार दोपहर बेटे मोहित के साथ श्यामानाला किनारे बकरियां चराने गए थे। पिता-पुत्र नाले पर बने रपटे को पार कर रहे थे। इसी दौरान मोहित का पैर फिसल गया और वह नाले के तेज बहाव में बहने लगा। बेटे को बहता देख रामकिशोर ने नाले में छलांग लगा दी थी। उन्होंने किसी तरह बेटे को सुरक्षित बाहर निकाल दिया लेकिन खुद पानी के तेज बहाव में डूब गए।
सूचना मिलने पर एसडीएम करनवीर सिंह और सीओ राजकुमार पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों के साथ देर रात तक नाले में रामकिशोर की तलाश की लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला था। रविवार सुबह एनडीआरएफ की टीम ने फिर से खोज अभियान शुरू किया। करीब 10 बजे रपटे से 500 मीटर दूर झाड़ियों में रामकिशोर का शव फंसा मिला। पुलिस ने शव नाले से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। तहसीलदार धनंजय कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हादसे का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
मजदूरी कर चलाता था परिवार
ग्राम प्रधान प्रभात यादव ने बताया कि रामकिशोर के दो बेटे और एक 18 वर्षीय बेटी है। उसके हिस्से में करीब डेढ़ बीघा जमीन थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह गांव में मजदूरी और चरवाही का काम करता था। हादसे के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बेहाल हैं।
फोटो 13 एचएएमपी 06- मृतक रामकिशोर की फाइल फोटो। स्रोत: परिजन