कुरारा (हमीरपुर)। होली पर्व के बाद दूज को विजय प्रतीक गरुण ध्वज शानो शौकत व गाजे बाजे के साथ कस्बे में निकाला गया। कस्बे में सैकड़ों वर्षों से प्राचीन ऐतिहासिक विजय ध्वज निकालने की परंपरा है। यह गौर वंश की विरासत है, इसका इतिहास पुराना है।
कस्बा निवासी बजुर्ग श्याम सिंह, बच्चा सिंह आदि ने बताया कि पुराने समय में हरेहटा गांव में जलसा हुआ करता था तथा विजय ध्वज को हमीरपुर यमुना नदी में नहलाने ले जाते थे। इसके बाद सिकरोढ़ी गांव जाने लगे, फिर बचरौली में झंडा नहलाने जाने के बाद वहां विरोध होने पर झगड़ा हो गया। बताया कि कोडार्क देव के नाम पर कुरारा का नामकरण हुआ। कोडार्क देव के दो पुत्र हुए जिनमें एक महलदेव व दूसरे खान देव, इनके वंशज कस्बे में निवास करते हैं। वही लोग आज भी इस प्राचीन परंपरा को जीवंत किए हैं। रात्रि में रामलीला व नौटंकी के कार्यक्रम संपन्न होते हैं। कंडौर गांव निवासी डा.देवेंद्र सिंह गौर ने बताया कि हमारे गांव में होलिका दहन के बाद अष्टमी को फ़ाग गायन के साथ होली मनाई जाती है। इस दिन गांव में जलसा होता है। यह परंपरा आज भी चली आ रही है।