हमीरपुर। जिला उद्योग केंद्र के दो अफसरों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई के बाद मंगलवार को पूरे दिन विभाग में सन्नाटा पसरा रहा। लाभार्थियों का कहना है कि विभागीय कर्मचारी व दलाल ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले लाभार्थियों को अपने चंगुल में फंसाकर पांच लाख के आवेदन में पांच प्रतिशत कमीशन तय करते थे। विभाग लोन दिलाने के नाम पर धन उगाही का अड्डा बनकर रह गया था।
निलंबित उपायुक्त उद्योग रवि वर्मा ने उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय कानपुर में मंगलवार को चार्ज ग्रहण कर लिया है। वहीं, प्रयागराज से आई नवनियुक्ति उपायुक्त उद्याेग जयश्री जिले का कार्यभार आज संभाल सकती हैं। फिलहाल अभी प्रभारी उपायुक्त उद्योग अभिषेक कुमार के हाथ में विभाग की बागडोर है।
बता दें कि जिला उद्योग केंद्र में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी टूलकिट योजनाओं के लाभार्थियों ने शासन स्तर को विभाग में धन उगाही किए जाने का आरोप लगाकर शिकायत की थी। वहीं, डीएम घनश्याम मीना ने बीते साल दिसंबर माह में समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं की खराब प्रगति पर नाराजगी जाहिर की थी। जिसपर विभाग ने बैंकों पर ठीकरा फोड़ते हुए लोन सेंग्सन न करने का आरोप लगाया था।
वहीं, बैंक अधिकारियों ने सफाई देते हुए उद्योग विभाग पर लाभार्थियों से धन उगाही का आरोप लगाया था। मामले में आठ से 10 लाभार्थियों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई थीं। जांच में विभागीय कर्मचारियों ने भी अवैध धन उगाही करने का मामला स्वीकार किया था। शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि विभाग में जब वह आवेदन के लिए जाते तो कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा फार्म भरवाया जाता था और पांच लाख तक के आवेदन में उनसे चार-पांच हजार रुपये तक लिए जाते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। जांच रिपोर्ट में विभाग में चल रहे धन उगाही के खेल की पुष्टि होने पर डीएम ने शासन को जांच रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की मांग की थी।