हमीरपुर। सीएचसी से रेफर होकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे 55 दिन के मासूम की मौत ने स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। रेफर लेटर के बावजूद डयूटी पर तैनात डॉक्टर ने उपचार करने के बजाए पिता को ओपीडी का पर्चा बनवाने भेज दिया। आरोप है कि पर्चा काउंटर पर भीड़ होने की वजह से 25 मिनट का समय लगा गया, इसके बाद ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने की बात कह दी गई। इस बीच मासूम की सांसें टूट गईं।
महेरा गांव निवासी राजू ने बताया कि उसके भतीजे संदीप का बेटा अयांश 55 दिन का था। 23 सितंबर को दोपहर तीन बजे मुस्करा सीएचसी से गांव की आशा बहू के साथ एएनएम उसके घर पहुंची। बच्चे के नियमित टीकाकरण की बात करते हुए उन्होंने टीका लगाया। टीकाकरण के कुछ देर बाद ही अयांश को तेज बुखार आ गया। हालत बिगड़ने पर उसे 24 सिंतबर को बिवांर अस्पताल ले गए। यहां पर बताया गया कि बुखार आ गया है ठीक हो जाएगा।
शुक्रवार सुबह हालत बिगड़ने पर मुस्करा सीएचसी ले गए। यहां पर डॉक्टर ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे। यहां पर तैनात डॉक्टर ने बच्चे को देखने की बजाए पर्चा बनवाने की बात कह दी। परिजनों के मुताबिक, जिला अस्पताल पहुंचने पर बच्चा गंभीर हालत में था। इसके बावजूद उसे तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने के बजाय उसके पिता को ओपीडी पर्चा बनवाने भेज दिया गया। पर्चा बनने के बाद बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में करीब 30 मिनट निकल गए। इसी बीच बच्चे की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई। मौत की पुष्टि डॉक्टर ने जैसे ही की तो परिजन बिलखने लगे और स्वास्थ्य सिस्टम पर आरोपों की झड़ी लगा दी।
फोटो 25 एचएएमपी 25- ओपीडी पर्चा।
फोटो 25 एचएएमपी 25- ओपीडी पर्चा।
फोटो 25 एचएएमपी 25- ओपीडी पर्चा।
फोटो 25 एचएएमपी 25- ओपीडी पर्चा।