हमीरपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन अब केवल वार्षिक या अर्धवार्षिक परीक्षाओं के आधार पर नहीं होगा। बेसिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों को सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी समझ, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता का आकलन करना है। परिषद के निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखनी होगी। केवल लिखित परीक्षा के अंक ही नहीं, बल्कि दैनिक कक्षा गतिविधियों, मौखिक प्रस्तुति और व्यावहारिक कार्यों को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाएगा।
सतत एवं समग्र मूल्यांकन के तहत विद्यार्थियों से मौखिक प्रश्नोत्तरी कराई जाएगी। इसके अलावा कार्यपत्रक, परियोजना कार्य, समूह गतिविधियां, कक्षा में सहभागिता, रचनात्मक कार्य और सीखने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा। इससे बच्चों की कमजोरियों और क्षमताओं की पहचान समय रहते हो सकेगी और शिक्षकों को उन्हें बेहतर मार्गदर्शन देने में मदद मिलेगी।
सभी परिषदीय विद्यालयों को सतत एवं समग्र मूल्यांकन के लिए निर्देशित किया गया है। इससे बच्चे का पढ़ने, लिखने के साथ-साथ बौद्धिक क्षमताओं के बारे में पता चल सकेंगे। इससे शिक्षक उनको बेहतर तरीके से पढ़ा सकेंगे। - आलोक कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी