हमीरपुर। नगर पंचायत कुरारा में तालाब की जमीन पर निर्माणाधीन छह दुकानों का मामला प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। एक ही मामले में दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) जहां शिकायत को फर्जी करार दे रहे हैं। वहीं राजस्व विभाग की जांच में शिकायत के बिंदु सही पाए गए हैं। विरोधाभासी रिपोर्टों के कारण दुकानों का निर्माण कार्य फिलहाल ठप पड़ा हुआ है।
नगर पंचायत कुरारा की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से दुकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई। तालाब की भूमि पर दुकानों का निर्माण भी शुरू हो गया। इसी दौरान वार्ड-9 निवासी सांसद प्रतिनिधि व पूर्व चेयरमैन माया वाल्मीकि ने शिकायत की। आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर तालाब की भूमि पर दुकानें बनाई जा रही हैं। 15 जनवरी 2026 को उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की। आरोप था कि गाटा संख्या 2529 का रकवा 1.181 जो तालाब की जमीन में दर्ज है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई। आईजीआरएस की शिकायत के निस्तारण की जिम्मेदारी उन्हीं अधिशासी अधिकारी को दी गई जिन्होंने दुकानों के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई थी।
शिकायत का निस्तारण किया गया और फोटो अपलोड करके शिकायतकर्ता को झूठा बता दिया। शिकायत को पूर्णतया फर्जी बताकर रिपोर्ट लगा दी गई। शिकायतकर्ता को जब जानकारी हुई तो उन्होंने चार फरवरी 2026 को जिला प्रशासन से इसकी की। इस पर अपर जिलाधिकारी न्यायिक, प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय ने मामले की जांच एसडीएम को सौंपी। एसडीएम सदर के निर्देश पर तहसीलदार ने मामले की जांच के लिए नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। जांच कमेटी ने राजस्व के अभिलेखों को खंगाला और स्थलीय निरीक्षण कर जांच आख्या सौंप दी।
नायब तहसीलदार की राजस्व जांच में शिकायत के बिंदु पूरी तरह सही पाए गए। विरोधाभासी रिपोर्टों के चलते प्रशासन पूरी तरह से बैकफुट पर है और दुकानों के निर्माण को रोक दिया गया है। बड़ा सवाल यह है कि शिकायत का फर्जी निस्तारण करने वाले के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
दोषियों पर कार्रवाई तक लड़ाई जारी रहेगी
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि राजस्व विभाग की रिपोर्ट को आधार माना जाता है तो तालाब की जमीन पर निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। शिकायतकर्ता पूर्व चेयरमैन माया वाल्मीकि का कहना है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच चाहती हैं और दोषियों पर कार्रवाई होने तक लड़ाई जारी रखेंगी। सही शिकायत को फर्जी बताया गया। उन्होंने कहा कि शिकायतों का फर्जी निस्तारण नियति बन चुकी है।
अतिक्रमण हटाने गए थे, अतिक्रमण कर बैठे
नगर पंचायत कुरारा में जिस जमीन पर दुकानें बन रही हैं वहां पर अतिक्रमण की शिकायत पहले की गई थी। शिकायत के आधार पर नगर पंचायत प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटवाया। इसके बाद ईओ ने उसी स्थान पर दुकानें बनवाने का प्रस्ताव तैयार कराया। बताया जा रहा है कि इसके बाद प्रस्ताव पास होने के बाद काम शुरू करा दिया गया। अतिक्रमण हटाने गए और अब स्वयं ही अतिक्रमण कर बैठे।
प्रभारी अधिकारी नहीं दे रही हैं जवाब
अपर जिलाधिकारी न्यायिक रिजवाना शाहिद के पास प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय का भी प्रभार है। उनका सीधा कहना है कि जो भी बयान देंगे अधिशासी अधिकारी देंगे। उन्हीं से बात करें। जब उनसे पूछा गया कि जांच आपके आदेश पर हुई है आप प्रभारी अधिकारी हैं तो उन्होंने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा।
टाउन फंड से दुकानें बनाने की योजना तैयार की गई है। दुकानें बन रही थीं। शिकायतों के बाद काम रोक दिया गया है। पास में ही नजूल भूमि है। यही माना गया था कि यह नजूल की जमीन है। फिलहाल काम रुका है। अब आगे कोई जांच के निर्देश मिलेंगे तो लोक निर्माण विभाग एवं अन्य जिम्मेदारों की टीम के साथ जांच कराई जाएगी। -बलराम गुप्ता, प्रभारी अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत कुरारा
फोटो28 एचएएमपी 05- कुरारा में निर्माणाधीन दुकानें। संवाद
फोटो28 एचएएमपी 05- कुरारा में निर्माणाधीन दुकानें। संवाद