-हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे
-बेटे ने भगवान का धन्यवाद किया, वहीं मां की मौत का गम भी जताया
संवाद न्यूज एजेंसी
मौदहा (हमीरपुर)। सिसोलर थाना क्षेत्र के ग्राम भुलसी में नौ अगस्त 1982 को हुई हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 100 वर्षीय धनीराम की हाईकोर्ट ने सजा माफ कर दी है। फैसले से परिजनों के आंसू छलक पड़े।
धनीराम के बेटे लालाराम ने भगवान का धन्यवाद किया वहीं मां की मौत का गम भी जताया। घटना के समय गांव के राजाभैया कुम्हार ने अपने ही सजातीय धनीराम पुत्र गुरवा, उसके भाई सत्तीदीन और सत्तीदीन के बेटे मैकू पर गांव से आठ किलोमीटर दूर एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या का आरोप लगाते हुए मौदहा कोतवाली में नामजद तहरीर दी थी।
पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां 1984 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस बीच दो आरोपियों की मौत हो चुकी थी और केवल धनीराम ही जेल में सजा काट रहे थे। भुलसी गांव के वर्तमान प्रधान और धनीराम के बेटे लालाराम ने बताया, जब वह मात्र पांच वर्ष के थे तब पिता, ताऊ और उनके बेटे को गांवदारी की रंजिश में फंसाया गया था। गरीबी के कारण पैरवी न हो सकी जिससे सजा हो गई। आज पूरा परिवार, गांव के लोग और मेरे सगे सबंधी सभी खुश है।