गहरौली (हमीरपुर)। गांव में सूखे पड़े तालाब में मंच बनाकर तीजा महोत्सव का धूमधाम से आयोजन हुआ। तीजा कमेटी ने भगवान श्रीकृष्ण समेत अन्य देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियों की शोभायात्रा पूरे गांव में निकाली। झांकियों का जगह-जगह पुष्प वर्षा के साथ लोगों ने स्वागत किया। वहीं इस अवसर पर लगे दो दिवसीय मेले में महिलाओं ने जमकर खरीदारी की।
तीज महोत्सव को लेकर गांव में खासा उत्साह रहा। शोभायात्रा में श्रीकृष्ण और बलराम, शिव पार्वती व अन्य देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियां शामिल रहीं। गांव भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह श्रीकृष्ण की आरती उतार पूजा की। दोपहर बाद ढलत तालाब में श्रीकृष्ण की नाग नाथन लीला व कंस वध का मंचन किया गया। वहीं दो दिवसीय मेला शुरू हो गया। दूरदराज से गांव से आए सैकड़ों दुकानदारों ने दुकानें लगाईं।
जिसमें महिलाओं व बच्चों ने जमकर खरीदारी की। आयोजन कमेटी में प्रधान वीरेंद्र कुमार राजपूत ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर चंद्रशेखर दीक्षित, कृष्णानंद, भूप सिंह राजपूत, मूलचंद, बबलू राजपूत, शिवपाल, शर्मा मास्टर रोहित यादव, डॉ. महिपाल यादव आदि रहे।
नहीं मनाया गया तीज मेला, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
भरुआसुमेरपुर। 170 सालों में यह तीसरा मौका है, जब कस्बे में ऐतिहासिक तीज मेला नहीं हुआ। कोरोना के कारण प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। जिससे झांकियां नहीं निकल सकीं। जिससे लोगों में मायूसी देखी गई। ऐतिहासिक तीज मेले का इतिहास 170 साल पुराना है। प्रतिवर्ष विभिन्न मनमोहक झांकियां कस्बे के चांद थोक स्थित श्रीकृष्ण मंदिर से निकालकर नगर भ्रमण कर वापस हरचंदन तालाब में नागनाथन लीला के साथ होती है। बीते दो वर्षों से कोरोना के कारण इस मेले पर काल बनकर छाया है। प्रशासन से अनुमति न मिलने पर ऐतिहासिक मेला नहीं हो सका।
वर्ष 1984 में जब कस्बे के आस्था के केंद्र ब्रह्मलीन स्वामी रोटीराम महाराज की हत्या हुई तो लोगों में रोष व्याप्त था। तब कमेटी ने विरोध में ऐतिहासिक तीज मेला नहीं मनाया था। तीजा कमेटी के सचिव नवल मिश्रा व महेश पांडेय ने बताया प्रशासन से अनुमति न मिलने से इस बार भी तीज मेला में झांकियां नहीं निकाली गई हैं। श्रीकृष्ण मंदिर में ही श्रीकृष्ण व बलराम की झांकियां तैयार कर आरती पूजन के साथ नागनाथन की आदि लीला की परंपरा को निभाया गया। इस मौके पर थानाध्यक्ष वीपी सिंह, अजय द्विवेदी, सुरेश यादव, बृजलाल सिंह, ओमेश सिंह, संजीव पांडेय, कैलाश गुरु आदि मौजूद रहे। (संवाद)