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Hamirpur News: आठ माह से अटका केंद्रीय वित्त का बजट, पंचायतों के विकास कार्य ठप

Sat, 20 Sep 2025 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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हमीरपुर। केंद्रीय वित्त से धनराशि नहीं मिलने से पंचायतों के सामने संकट खड़ा हो गया है। करीब आठ माह से 15वें वित्त की ग्रांट नहीं आई है। इसके चलते गांवों में विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं।
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जिले में 330 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों में होने वाले विकास कार्य जैसे सड़क और नाली निर्माण, पथ प्रकाश आदि कार्य 15वें वित्त की धनराशि से कराए जाते हैं। पिछले साल दिसंबर माह में इससे धनराशि जारी की गई थी। इसके बाद पंचायत को बजट जारी नहीं किया गया। चालू वित्तीय वर्ष के आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन केंद्रीय वित्त की एक भी किस्त अभी तक जारी नहीं की गई है। वहीं, जल्द ही ग्राम पंचायत का कार्यकाल खत्म होने वाला है। आगामी मार्च या अप्रैल माह में पंचायत चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पंचायतों के विकास कार्य नहीं होने से वर्तमान ग्राम प्रधान परेशान हैं। उन पर विकास कार्य नहीं करने के आरोप लग रहे हैं। आठ माह से बजट नहीं मिलने के कारण गांवों में कई काम आधार में लटके हुए हैं। कई ग्राम प्रधानों ने अपनी जिम्मेवारी पर पंचायतों में कुछ विकास कार्य भी करा दिए, लेकिन बजट न मिलने से उनका भुगतान तक नहीं हो पा रहा है। केंद्रीय वित्त का करीब 40 करोड़ का बजट अटका है।



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प्रस्ताव तैयार, बजट का इंतजार

अभी तक केंद्रीय वित्त की दो किस्तें आ जानी चाहिए, लेकिन कोई बजट नहीं आया है। एक सीसी सड़क बनवाई थी। जिसका सात लाख रुपये सामग्री का भुगतान करना अवशेष है। कई कार्यों के प्रस्ताव भी तैयार रखे हैं। बजट के इंतजार में सारे विकास कार्य अटके पड़े हैं। चुनावी साल होने के कारण परेशानी हो रही है। - जीतेंद्र शिवहरे, ग्राम प्रधान देवगांव।
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बजट न मिलने से कई विकास कार्य ठप



बीते अप्रैल माह से 15वें वित्त आयोग का पैसा नहीं आया है। इसके चलते पूर्ण रूप से विकास कार्य ठप हो चुके हैं। मुख्य रूप से ग्राम पंचायतें केंद्रीय वित्त पर ही निर्भर रहती हैं। ऐसे में तमाम विकास कार्य अटके हुए हैं। वंदना सचान- ब्लॉक अध्यक्ष, प्रधान संगठन सुमेरपुर।









चालू वित्तीय वर्ष में केंद्रीय आयोग का कोई बजट अभी तक नहीं आया है। इसके चलते ग्राम पंचायतों के विकास कार्य ठप हैं। यह बजट कब तक आएगा, उन्हें जानकारी नहीं है।
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- जीतेंद्र मिश्रा, डीपीआरओ।
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