चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र: न विकास की बात-ना खिलाफ बात, ‘बाहुबली’ के नाम पर बहुमत विनय के साथ
एक नजर में
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में 4.61 लाख मतदाता हैं। 800 गांव, 480 बूथ हैं। इस क्षेत्र से बड़हलगंज और गोला विकास खंड पूरी तरह से जुड़े हैं। गगहा, उरुवा और बेलघाट विकास खंड आंशिक रूप से जुड़े हैं। बाहुबली पंडित हरिशंकर तिवारी ने 1985 में निर्दलीय विधायक के तौर पर यहां से चुनाव जीता था, फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 90 के दशक में ऐसा रसूख कायम हुआ कि यूपी में जिस भी पार्टी सरकार बनी, उसके मंत्रिमंडल में हरिशंकर तिवारी को जगह मिली। वह 1997 से 2007 तक यूपी सरकार में मंत्री रहे। 22 वर्ष तक विधायक रहे तिवारी 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव मौजूदा परिस्थितियों के चलते चुनाव हार गए। 2017 का विधानसभा चुनाव हुआ तो तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को हरिशंकर तिवारी के उत्तराधिकारी के तौर पर जनता ने आर्शीवाद दिया और वे जीतकर विधानसभा पहुंच गए।
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चिल्लूपार विधानसभा, यहां के लोगों से चाहे कितने सवाल करेें, वे बहुत कुछ कहना नहीं चाहते। जो लोग कुछ कहना चाहते हैं, वो नाम नहीं छपवाना चाहते हैं। अमर उजाला की खास पेशकश ‘ढाई साल-क्या है हाल’ के संदर्भ में जब हम क्षेत्रीय विधायक विनय शंकर तिवारी से क्षेत्र में विकास की बात करते हैं तो वे कहते हैं कि आप का सवाल ही गलत हैं। क्षेत्र का विकास विधायक की नैतिक जिम्मेदारी है, उसका मूल काम विधायी है। आप पूछिए, मैंने सदन में कितने सवाल उठाए। वैसे भी मैं, सत्तापक्ष का विधायक तो हूं नहीं। क्षेत्र के विकास के लिए जो बन पड़ा किया, जो बन पड़ेगा करूंगा। ठीक भी कह रहे हैं, यह विधानसभा क्षेत्र विनय को विरासत में मिला है। यहां स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे गौण हैं, फिर भी नंबर देने की बारी आई तो लोग विधायक को दस में से आठ-दस नंबर देने को तैयार नजर आए।
नंबर के पचड़े में हम नहीं पड़ेंगे
गांव-जवार की सड़कें बदहाल हैं। जिस सड़क से होकर आप आए हैं, उसकी ही हालत देख लिजिए। क्या कहें, आप समझ ही रहे होंगे। ज्यादा बोल भी नहीं सकते। जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई का ही देखिए। एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। विद्यार्थी ज्यादा हैं, एक शिक्षक कैसे पढ़ा लेगा, यह समझने वाली बात है। आप नंबर देने की बात कर रहे हैं। इस पचड़े में हम नहीं पड़ेंगे। आपके जो मन आए लिख लीजिए।
बंधु प्रसाद गौड़, बौरिया खास
किसको फ्रिक है, आगे कुछ नहीं कहना
ढाई साल का कार्यकाल बीत गया, लेकिन उम्मीद पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ सकी। आपको बताएं बारिश में क्षेत्र के कई लोगों के कच्चे मकान ढह गए थे। गरीब परेशान रहे पर कोई झांकने तक नहीं आया। गरीब हजारों समस्याओं से जूझ रहा है। चिल्लूपार क्षेत्र को विकास की जरूरत है। इसकी फिक्र किसी को नहीं है। जो दिल में आया बोल दिए, आगे कुछ नहीं कहना है।
पंडित रमाकांत मिश्र, डेरवा
सत्ता में तो हैं नहीं, भईया मोर्चा संभाले हैं
मेरी बात जरा ध्यान से सुनिए। यूपी में भाजपा की सरकार है। विनय भइया बसपा से विधायक हैं। सत्ता में नहीं हैं, फिर भी क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। बारिश व बाढ़ के दौरान विधायक जी डेरवा गांव में डटे रहे। कटान रुकवाने का काम सिंचाई विभाग का था, लेकिन भईया मोर्चा संभाले रहे। अफसरों से बात की और ग्रामीणों की मदद कराई। पूर्णांक तो नहीं, फिर भी 10 में से आठ नंबर दूंगा।
पंकज तिवारी, डेरवा
समाधान शासन को करना, इसमें विधायक का क्या रोल
भइया, चिल्लूपार क्षेत्र बहुत बड़ा है। पांच विकास खंड की जनता मतदान करती है। विधायक की सक्रियता बनी रहती है। क्षेत्र में काम भी हुआ है। कुछ मामले ऐसे हैं, जिसका समाधान शासन स्तर से संभव है। इसमें विधायक का कोई रोल नहीं होता है, इसलिए नंबर देने में बहुत कंजूसी नहीं करूंगा। सात-आठ नंबर जरूर देना चाहूंगा।
विवेक तिवारी, बिरई गांव उरुवा बाजार
विकास देख लीजिए, शर्म आ जाएगी
कोलखास गांव का प्राथमिक विद्यालय आज भी पुल के नीचे छप्पर में चलता है। जो बच्चे पढ़ते हैं, उनका जीवन हमेशा खतरे में रहता है। यह विधायक भी जानते हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। पटना पौहरिया गांव का विकास देख लीजिए तो आपको खुद शर्म आएगी। बारिश, बाढ़ में जनता परेशान रही लेकिन विधायक जी क्षेत्र में नहीं दिखे। आप ही बताइए, कैसे नंबर और क्या नंबर दे दूं ?
राजकिशोर सिंह मुन्ना, पौहरिया गांव
खौफ में खुलकर बात नहीं कह पाते
बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। यह विधायक को नहीं दिखता है क्या? मिश्रौलिया और छपिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे अर्से से कोई चिकित्सक नहीं है। क्षेत्र की जनता निजी और महंगे अस्पतालों में इलाज कराने को विवश है। मोदी लहर में जनता ने बसपा प्रत्याशी को जिताया है। अब पछता रही है। क्षेत्र में विधायक का खौफ है, इसलिए बहुतेरे अपनी बात खुलकर नहीं रख पाते हैं।
राम सिंगार सिंह, खड़ेसरी बड़हलगंज
गरिमा कम हो जाएगी, नंबर नहीं दूंगा
भाई, क्षेत्र की हालत बहुत खराब है। ज्यादातर गांवों से जल निकासी की व्यवस्था नहीं है। गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग बन जरूर रहा लेकिन इससे आवागमन बेहद कठिन है। इस मामले को विधायक ने कभी नहीं उठाया। ददरी, बैरियाखास गांव के पास राप्ती नदी पर पीपा पुल अब दो महीने देरी से लगता है। आछीडीह से सरया गांव तक सात किलोमीटर लंबा बंधा सालों से नहीं बन सका। इससे सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब जाती है। क्षेत्र में बाढ़ की नौबत आती है। नंबर देने से विधायक की गरिमा कम हो जाएगी, इसलिए नंबर नहीं दूंगा।
शिवाजी सिंह, सेमरा गांव
विकास के लिए संघर्ष करते रहते हैं
देखिए भाई, मैं तो विधायक जी को दस में से आठ नंबर दूंगा। उनकी सक्रियता क्षेत्र में हमेशा बनी रहती है। भेदभाव के बगैर काम करते हैं। क्षेत्र में काफी काम हुआ है। वैसे भी विधायक सत्ता पक्ष के नहीं हैं। जो चाहते हैं, वह नहीं हो पाता है। ऐसे में कम नंबर देना विधायक के साथ ज्यादती होगी। सत्ता में नहीं है, फिर भी विकास के मुद्दे पर संघर्ष करते दिखते हैं।
धर्मेंद्र शुक्ल, झुमिला कारौंदी
विधायक की बात
विकास नहीं, विधायी काम है विधायक का मूल दायित्व
सवाल: आपने क्षेत्र का कितना विकास किया, कुछ उपलब्धियां बताइए?
जवाब: देखिए, आप गलत सवाल कर रहे हैं। विधायक का नैतिक दायित्व है कि वह क्षेत्र का विकास करे, लेकिन उसका मुख्य काम विधायी है। क्षेत्र के विकास से संबंधित करीब 60 मामले विधानसभा के अलग-अलग सत्र में उठाए हैं। धुरियापार में चीनी मिल का मामला कई बार विधानसभा में उठाया। गोला, बड़हलगंज बस डिपो बनाने की मांग भी रखी। उम्मीद है बस डिपो के लिए जल्द ही बजट मिल जाएगा। बड़हलगंज में मंडी स्थापित कराने का मामला विधानसभा में उठा चुका हूं। आमी नदी में प्रदूषण सहित कई और मामले उठाए हैं।
सवाल: क्षेत्र की सड़कें खराब हैं। इस पर क्या कहेंगे?
जवाब- विधानसभा क्षेत्र की 600 किलोमीटर लंबी सड़कें मरम्मत कराई जा रही हैं। गोरखपुर-बड़हलगंज राष्ट्रीय राजमार्ग का 10 किलोमीटर हिस्सा चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। इसे ठीक कराने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी पत्र लिख चुका हूं। कुछ काम जानबूझकर लटकाए गए हैं। झुमिला लखनापार सड़क महज 150 मीटर नहीं बनाई गई। रामजानकारी मार्ग का निर्माण कार्य लटकाया गया है।
सवाल: आरोप है कि आप क्षेत्र में कम रहते हैं, बारिश और बाढ़ में भी नहीं पहुंच सके, क्या कहेंगे?
जवाब: ऐसा नहीं है। कोलखास गांव में नदी का कटान हुआ तो मैं ही मौके पर पहुंचा था। अब भी लोग बंधे पर रहते हैं, इसकी जानकारी शासन, प्रशासन को दी जा चुकी है। जगदीशपुर गांव में कटान हुआ तो सारी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जो संभव मदद हो सकती थी, वह की भी। आरोप कोई भी लगा सकता है। दो बार (2007, 2012) में चुनाव जीतने वालों ने कोई काम नहीं किया था, इसीलिए जनता ने हरा दिया।
सवाल: विकास के मोर्चे पर क्षेत्र के कई लोग आपको नंबर देने को तैयार नहीं हैं?
जवाब: किसी के नंबर देने या न देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। प्रतिद्वंदी क्या कहता है, इस पर गौर करने की जरूरत नहीं है। सरकार की मंशा ही नहीं है कि क्षेत्र का विकास हो। कोई भी व्यक्ति निर्विवाद नहीं हो सका है, काम करेंगे तो गलती भी होगी।