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एमएलसी टिकट को लेकर गर्म रहा सियासी माहौल

Fri, 12 Feb 2016 01:35 AM IST
गोरखप़ुर। अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव के गहमा-गहमी के बीच करीब सुबह दस बजे गोरखपुर तथा बस्ती क्षेत्र से सपा के घोषित प्रत्याशियों के टिकट कटने की बात तेजी से फैल गई। टिकट पाने वालों के समर्थक जश्न मनाने लगे। वहीं उनके विरोधियों में मायूसी छा गई। मोबाइल पर राजनधानी के नम्बर डायल होने लगे।
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 दोनों जिलों के प्रत्याशियों ने समर्थकों सहित चंद घंटे के अंदर राजधानी में दस्तक दे दी। सरपरस्तों के साथ सपा मुखिया के दरबार में हाजिर हो गए। थोड़ी ही देर बाद लखनऊ से फोन आने शुरू हो गए। जहां खुशी थी वहां मायूसी पसरने लगी। खामोश लोगों के होठों पर फिर मुस्कराहट लौट आई।

गुरुवार को गोरखपुर-महराजगंज क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की तरफ से घोषित प्रत्याशी जयप्रकाश यादव को यह सूचना मिली की उनका टिकट काट कर सीपी चंद को पार्टी ने उम्मीदवार बना दिया है। वह समर्थकों के काफिले के साथ पार्टी कार्यालय पर नामांकन की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे। टिकट कटने की सूचना मिलते ही वह अपने समर्थकों सहित राजधानी की तरफ कूच कर गए। उधर बस्ती में कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह भाई ब्रहकिशोर सिंह ऊर्फ डिंपल का नामांकन करा कर जैसे ही कार्यालय पहुंचे उन्हें सूचना मिली की उनके भाई की जगह सनी यादव को टिकट दे दिया गया है। साथ ही कहा गया कि वे लखनऊ पहुंचे।
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चंद घंटे के अंदर वह राजधानी में जा धमके। थोड़ी देर बाद अपने फेसबुक पर उन्होंने मैसेज पोस्ट कर दिया कि टिकट कटने की बात अफवाह है। समर्थक अफवाहों पर ध्यान न दें। उनके भाई ही सपा के अधिकृत प्रत्याशी हैं। वह ही सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। शाम होते ही स्थिति स्पष्ट हो गई। सपा की तरफ से कहा गया कि बस्ती और गोरखपुर में जिसे टिकट मिला है वह ही प्रत्याशी है।

पूर्व मंत्री एवं सपा प्रत्याशी जयप्रकाश यादव ने कहा कि इस तरह की बात आई थी कि टिकट कट गया है। वह लखनऊ पहुंचे और वहां पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। उनके सामने नेता जी ने एसआरएस यादव जो कार्यालय प्रभारी हैं को बुलाया। उनसे कहा कि जिसे टिकट मिला है वह ही चुनाव लड़ेगा। टिकट किसी का नहीं बदलेगा। उधर कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के खास से बात हुई तो कहा कि टिकट फिर डिंपल का फाइनल हो गया है। उधर एक प्रत्याशी ने शहर के चार प्रमुख अखबारों में एक-एक पेज के विज्ञापन का आर्डर दे दिया। विज्ञापन वाले संपादकीय विभाग में पूछते रहे टिकट का क्या हुआ।
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