कॅरियर के चरम पर फिल्मी दुनिया से किनारा कर आचार्य रजनीश ‘ओशो’ से विनोद खन्ना ने संन्यास की दीक्षा ली तो शहर में भी इसकी खूब चर्चा हुई। ओशो को मानने वालों में इसके बाद बढ़ोत्तरी भी आई। शहर के कुछ ओशो भक्तों की विनोद खन्ना से आध्यात्मिक कार्यक्रमों में मुलाकात भी हुई। उनके निधन पर बरबस उनसे जुड़ी यादें ताजा हो उठीं।
ओशो को मानने वाले डॉ. केशव ने बताया कि विनोद खन्ना पर आचार्य की कृपा थी। उनकी प्रेरणा से विनोद खन्ना ने चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया छोड़कर संन्यास का रास्ता चुना। ग्लैमर से किनारा कर वह आत्मा की ओर मुड़ गए। उनके करीबियों में शुमार होने के चलते वह आचार्य के साथ अमेरिका गए और वहां आश्रम में काफी वक्त भी गुजारा। 1982-83 में पूना आश्रम में उनसे मेरी मुलाकात हुई थी। अपनत्व से उन्होंने गले लगाया। बातें हुईं तो महसूस हुआ कि ओशो के साथ आत्मा से जुड़े लोगों में से वह एक थे।
ओशो भक्त असीम ने बताया कि विनोद जी के आचार्य रजनीश से जुड़ने के बाद समाज में ओशो की विचारधारा को जानने को लेकर उत्सुकता बढ़ गई। लोगों के जेहन में कौतूहल पैदा हुआ कि आखिर ऐसा क्या है, जिसके चलते सफल कॅरियर छोड़कर विनोद खन्ना संन्यासी बन गए।