इमरजेंसी काम के नाम पर नगर निगम में खूब खेल हो रहा है। जिस काम को टेंडर निकाल कर कराया जाना चाहिए उसे इमरजेंसी के नाम पर कराकर लाखों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। पिछले कई वर्षों से यह खेल चल रहा है।
नगर निगम अधिनियम की धारा 117-6 (बी) के तहत जनता की सेवा या सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी काम को इमरजेंसी में कराया जा सकता है। इसके अंतर्गत सिर्फ ऐसे काम कराए जाते हैं, जिसके लिए टेंडर निकाला जाना संभव नहीं हो और तत्काल इसे कराया जाना जरूरी है। यानी अगर कहीं पुलिया टूट गई हो, सड़क टूटने की वजह से दुर्घटना की आशंका बनी रहती हो, नाले का स्लैब टूट गया हो, जलभराव हो जाने की वजह से कोई निर्माण कार्य कराने की आवश्यकता हो। ऐसे अन्य जरूरी काम को इस धारा के अंतर्गत कराने का प्रावधान है। लेकिन नगर निगम में पिछले कई साल से ऐसे काम इमरजेंसी के नाम पर कराए जा रहे हैं, जिन्हें पूरा होने में दो से तीन महीने का समय लगता है।
सूचना के अधिकार के तहत संजय मिश्रा को मिली जानकारी में 2018 में करीब दो करोड़ की लागत से 36 काम कराए गए। इन कामों में सीसी सड़क, इंटरलॉकिंग सड़क, आरसीसी नाला, नाली और साइड पटरी पर टाइल्स लगाने जैसे काम शामिल हैं। इनमें से कई काम तो करीब 10 लाख रुपये तक के हैं। जबकि निगम के प्रावधान के अनुसार बिना टेंडर के मात्र एक लाख तक के काम कराया जा सकता है।
इस अधिनियम के अंतर्गत कराए गए कुछ काम
शिवपुर सहबाजगंज के सरस्वतीपुरम में नाली और इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण- 7.94 लाख रुपये
सूर्यकुंड ओवरब्रिज के पास आरसीसी नाले का निर्माण - 3.82 लाख रुपये
कचहरी गेट से प्रेस क्लब तक नाले का निर्माण- 9.72 लाख रुपये
हांसुपुर में हार्बर्ट बंधा रोड से रामलीला मैदान तक नाली व साइड पटरी पर टाइल्स लगाने का काम- 6.78 लाख रुपये
राप्तीनगर डॉक्टर एन्क्लेव परिसर में नगर निगम की जमीन का बाउंड्रीवाल का काम- 8.45 लाख रुपये
कचहरी चौक से पुलिस लाइन तिराहा, रेलवे बस स्टेशन से लेकर टाउनहाल तक थर्मोप्लास्टिक पेंट का कार्य- 8.06 लाख रुपये
दारुल उलूम मदरसा मोड़ से सूरजकुंड आरओबी के किनारे होते हुए सब्जी मंडी मुख्य नाले तक नाली निर्माण- 6.65 लाख रुपये
जनहित में जो भी काम जरूरी होते हैं, नगर निगम उसे कराता है। इसी के तहत ये सभी काम कराए गए हैं।
सुरेश चन्द, चीफ इंजीनियर, नगर निगम