गोरखपुर। एमबीबीएस की सौ सीटों की मान्यता बचाए रखने के लिए जूझ रहे बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इन दिनों एक और बड़ी समस्या परेशान किए है।
वह है कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए डेड बॉडी का उपलब्ध न होना। नतीजतन बॉडी का मॉडल दिखाकर एमबीबीएस डॉक्टर तैयार किए जा रहे हैं। विभाग के मुताबिक पांच साल से इसे लेकर प्रयास चल रहा है लेकिन पुलिस विभाग ने उन्हें एक भी डेड बॉडी उपलब्ध नहीं कराई।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. बिंदू सिंह के मुताबिक विभाग में इस समय केवल चार डेड बॉडी हैं। इनमें से दो बॉडी को एमसीआई के मुआयने के लिए सुरक्षित रखा गया है और दो को मॉडल के तौर पर एमबीबीएस विद्यार्थियों को दिखा दिया जाता है।
विभाग में विद्यार्थियों को मानव शरीर की प्रैक्टिकल जानकारी देने के लिए दस टेबल हैं। एक-एक टेबल पर 10-10 विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल की व्यवस्था है। ऐसे में सौ सीटों के लिए हर वर्ष कम से कम 10 डेड बॉडी की दरकार है, लेकिन 2011 से तमाम प्रयास के बावजूद एक भी डेड बॉडी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
डॉ. बिंदू सिंह ने बताया कि कॉलेज की ओर से इस बाबत कई बार पुलिस उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया। फोन किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। विभाग के उच्चाधिकारियों के जल्दी-जल्दी बदल जाने से हर बार नए अधिकारी के सामने नए सिरे से बात रखने में भी दिक्कत आती है।
पोस्टमार्टम के बाद बॉडी के रख-रखाव की दिक्कत
गोरखपुर। एनाटॉमी विभाग की अध्यक्ष डॉ. बिंदू सिंह के मुताबिक पोस्टमार्टम के बाद बॉडी इस स्थिति में नहीं होती कि उसे सुरक्षित रखा जा सके। इसे लेकर हमारा आग्रह यह रहता है कि ऐसी लावारिस डेड बॉडी उपलब्ध कराई जाए, जिसका पोस्टमार्टम न किया गया हो, लेकिन पुलिस विभाग बिना पोस्टमार्टम के डेड बॉडी देने में असमर्थता जता देता है।
डेड बॉडी देने के निर्णय का अधिकार जिला प्रशासन को है। जिला प्रशासन यह निर्णय कमेटी बनाकर करता है। फिलहाल जब से मैंने कप्तान का कार्यभार ग्रहण किया है, तबसे डेड बॉडी को लेकर मेडिकल कॉलेज की ओर से मेरे पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है। यदि कोई प्रस्ताव आता है तो उसे जिला प्रशासन तक पहुंचा दिया जाएगा।
- अनंत देव, एसएसपी, गोरखपुर