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इमरजेंसी में ताला बंद, जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर

Tue, 31 May 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेजों के पीजी सीट में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों को वरीयता देने के विरोध में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में इमरजेंसी पूरी तरह से ठप हो गई। आनन फानन सीनियर डॉक्टरों को कॉल कर बुलाया गया, मगर इमरजेंसी में ताला बंद होने से मरीजों को इंट्री ही नहीं मिल पा रही। उधर, जूनियर डॉक्टर वार्डों में भी घूमकर काम ठप करा रहे थे। देर रात तक इमरजेंसी का ताला नहीं खुल सका था।
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सोमवार की देर शाम जूनियर डॉक्टरों ने अचानक मेडिकल कॉलेज के गेट पर ताला बंद कर दिया। करीब बीस मिनट तक न तो कोई मरीज अंदर आ पा रहा था और न ही तीमारदार बाहर जा पा रहे थे। किसी तरह से वहां का ताला खुलवाया गया तो जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी में ताला बंद कर प्रदर्शन करने लगे।

उग्र जूनियर डॉक्टरों को समझाने के लिए प्राचार्य भी हिम्मत नहीं जुटा पाए। कई गंभीर मरीज बिना इलाज ही लौट गए। कुछ का इलाज प्राइवेट नर्सिंग होम में कराया गया। सहजनवां की गर्भवती गायत्री देवी को इमरजेंसी से लौटा दिया गया, जबकि सड़क हादसे में घायल कुशीनगर के रामकेवल को भी डॉक्टरों ने अंदर नहीं जाने दिया। मजबूरन घर वाले उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम ले गए।
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हड़ताल के चलते वार्डों में भर्ती मरीजों की भी मुसीबत बढ़ गई है। इसी के मद्देनजर सीनियर डॉक्टरों को कॉल करके बुलाया गया है और उनके भरोसे किसी तरह से मरीजों का इलाज किया जा रहा है मगर इस वक्त सीनियर डॉक्टरों की संख्या भी कम हैं। आधे से ज्यादा डॉक्टर लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं। 

क्या है मामला
जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक दो साल पहले डिप्लोमा कोर्स में पीएमएस डॉक्टरों को 30 फीसदी वरीयता देने का फैसला किया गया था। इसे आधार बनाते हुए पीएमएस संवर्ग के डॉक्टर हाईकोर्ट चले गए और पीजी सीट में वरीयता की मांग करने लगे। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पीएमएस संवर्ग के डॉक्टर सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएस वर्ग के डॉक्टरों को वरीयता देने का आदेश कर दिया। इसके बाद यूपी सरकार ने पुन:विचार याचिका दाखिल की है। इसी बीच सोमवार को लखनऊ में प्रवेश के लिए नई मेरिट लिस्ट बनाने के साथ ही काउंसलिंग शुरू हो गई तो जूनियर डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया।
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