इलेक्ट्रिक ट्रेन से सफर करने में अभी वक्त लगेगा, क्योंकि 17 किलोमीटर लंबाई में विद्युतीकरण का कार्य बाकी है। जानकारों की मानें तो इसे पूरा करने और सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) के ट्रायल में कम से कम चार महीने का समय लगेगा, क्योंकि बारिश के दौरान काम तेजी से पूरा करना आसान नहीं है।
बाराबंकी से छपरा तक 424 किलोमीटर इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के लिए वर्ष 2008 में काम शुरू हुआ था। मार्च 2012 तक इसे पूरा कर लेना था। गोरखपुर-बस्ती के बीच कार्य करने वाली फर्म के काम छोड़ देने से इसमें विलंब होता गया। इसे पूरा कराने के लिए पिछले महीने रेलवे ने दूसरे फर्म से करार किया है। अभी 17 किलोमीटर की लंबाई में विद्युतीकरण करना है।
ल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने जुलाई तक काम पूरा कराकर इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने का लक्ष्य रेलवे अधिकारियों को दिया है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए जुलाई तक काम पूरा होने की उम्मीद नहीं है। अभी विद्युतीकरण के बाद विद्युत सबस्टेशन का भी काम बाकी है। कार्य भी ट्रेनों को रोककर नहीं किया जाना है। रेलवे से जुड़े जानकारों की मानें तो मानसून सक्रिय होने के बाद कार्य प्रभावित होगा। दो से तीन महीने काम की प्रगति धीमी ही रहेगी।
इसके बाद सीआरएस का ट्रायल कराने के लिए समय लेने और ट्रायल होने में भी एक माह का समय लग जाएगा। ऐसे में अक्टूबर के बाद ही इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलने की उम्मीद है।