फर्जी एनओसी के जरिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) से बीएड की मान्यता हासिल करने वाले 40 कॉलेजों की गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने जवाबदेही तय कर दी है। इसे लेकर एनसीटीई से मांगी जानकारी के बीच यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर जब इस वर्ष यूनिवर्सिटी की ओर से एनओसी जारी ही नहीं हुई तो उन्होंने एनसीटीई से मान्यता कैसे हासिल कर ली? यूनिवर्सिटी से जारी हुए पत्र की जानकारी मिलने के बाद दायरे में आ रहे कॉलेज प्रबंधनों में हड़कंप मच गया है।
नोटिस में साफ तौर पर इस बात की भी चर्चा की गई है कि प्रदेश शासन के 15 जून 2015 के आदेश और एनसीटीई के 21 मई 2015 के निर्देश के मुताबिक कोई भी कॉलेज संबंधित यूनिवर्सिटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किए बिना मान्यता के लिए आवेदन नहीं कर सकता। बावजूद इसके नियम का उल्लंघन करते हुए कॉलेजों ने एनसीटीई से मान्यता ले ली। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉलेजों को इस नोटिस का जवाब देने के लिए 10 मई तक का वक्त दिया है।
दरअसल, 2016 में मान्यता के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने किसी भी कॉलेजों को अभी तक एनओसी नहीं दी है लेकिन कुछ कॉलेजों ने फर्जी एनओसी के सहारे एनसीटीई ने नियम 7.13 के तहत न केवल अस्थाई मान्यता ली बल्कि फर्जी तौर पर शिक्षक अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी कर नियम 7.16 के तहत स्थाई मान्यता भी हासिल कर ली। देवरिया और कुशीनगर के एक-एक कॉलेज की ओर से निरीक्षण मंडल के गठन की मांग के दौरान कुलपति ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ लिया। कुलपति ने विस्तृत जानकारी ली तो पता चला कि ऐसा सिर्फ दो नहीं बल्कि 40 कॉलेज प्रबंधनों ने किया है।
कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब आने के बाद समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय किया जाएगा। वैसे इस समस्या को 12 मई को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में भी रखा जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी