प्रमाण पत्रों और रसीदों की जांच करते लेखा अधिकारी और मुख्य नगर लेखा परीक्षक।
- फोटो : amar ujala
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों में हुई गड़बड़ी से परत दर परत पर्दा उठने लगा है। सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों ने प्रमाण पत्रों के लिए आवेदकों से लिए जाने वाले रुपये नगर निगम कोष में जमा ही नहीं किए। ऐसे प्रमाण पत्रों की संख्या तकरीबन एक हजार बताई जा रही है, जिनकी कुल रकम 25 से 30 हजार के बीच है।
मामले की जांच कर रहे अधिकारी रसीद और प्रमाण पत्रों का मिलान कर उन्हेें चेक कर रहे हैं। हालांकि इस बीच जांच के दायरे में आए कर्मचारी रुपये जमा करने कोष पहुंच गए।
बता दें कि नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र के लिए बीस रुपये और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दस रुपये की रसीद कटती है। 18 अप्रैल को लेखा अधिकारी बृजेश सिंह और मुख्य नगर लेखा परीक्षक इसरार अंबिया अंसारी और कृष्णानंद चौहान ने अचानक जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के कार्यालय पहुंचकर प्रमाण पत्रों और रसीदों को जब्त कर लिया।
सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में पता चला है कि तकरीबन एक हजार प्रमाण पत्रों के रुपये कोष में जमा नहीं किए गए थे। उधर इस मामले में गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों को जब अपनी गलती मालूम हुई तो वह कोषाधिकारी के पास रुपये जमा करने पहुंच गए, लेकिन अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक रुपये जमा करने से इन्कार कर दिया।
जारी किए गए एक हजार प्रमाण पत्रों के रुपये जमा न होने की जांच चल रही है। जल्द ही जांच रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंप दी जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- इसरार अंबिया अंसारी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक