शहर को हाईटेक तरीके से सुरक्षित करने के उद्देश्य से चौराहों पर सीसी कैमरे लगाने की कवायद फाइलों में बंद हो गई है। सोशल वेलफेयर और पुलिस अफसरों के बीच के करार में नगर निगम का टैक्स शर्त रोड़ा बन गया है। यही वजह है दो साल पहले शुरू हुई यह कवायद आज भी फाइलों से बाहर धरातल पर नहीं आ सकी है। अब पुलिस महकमा भी पूर्व में लगे छह कैमरों को बचाने की कोशिश कर रहा है। टैक्स बकाया भरकर नगर निगम से जैसे-तैसे पुलिस महकमे ने जगह बचाई है।
शहर में बढ़ते अपराध को देखते हुए सीसी कैमरे की जरूरत खुद पुलिस अफसर भी महसूस करते हैं। जिन घटनाओं में कैमरे में अपराधियों की तस्वीर रिकॉर्ड हो जाती है, उन घटनाओं का पुलिस आसानी से खुलासा तो कर ही लेती है, साथ ही मुल्जिम को सजा दिलाने में भी सफल रहती है। वहीं जिन घटनाओं में कैमरे की मदद नहीं मिल पाती है वे घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती बन जाती है। इसे देखते ही दो साल पहले एसएसपी ने एक कवायद की थी। व्यापारियों के साथ ही एक प्राइवेट संस्था से करार कर शहर के ऐसे 21 स्थानोें को चिह्नित किया था। मगर महज छह जगहों पर ही कैमरा लग पाया।
21 में से छह जगहों पर कैमरे लगाने का हुआ था करार
सोशल वेलफेयर नामक संस्था से पुलिस अफसरों का 21 स्थानों पर कैमरे लगाए जाने का करार हुआ था। इसमें से छह जगहों पर कैमरे भी लगा भी लिए गए हैं। रेती चौक, नखास चौक, अग्रसेन तिराहा, घासीकटरा, दीवानी कचहरी, गणेश चौक, जाफरा बाजार, असुरन चौैक, टीपी नगर, नौसड़ समेत 21 जगहों पर कैमरे लगाने थे।
टैक्स के फेर में फंसी है योजना
छह जगहों पर कैमरे लगाने के बाद सोशल वेलफेयर ने विज्ञापन का शर्त लगा दिया। इसके बाद एसएसपी की ओर से नगर निगम को पत्र लिखकर 21 जगहों पर टैक्स की जानकारी मांगी। नगर निगम ने छह जगहों पर टैक्स निर्धारण करते हुए अन्य जगहों का हिसाब-किताब भी भेज दिया है। इसी के बाद से मामला फंसा हुआ है।
अप्रैल में पुलिस महकमे ने दिया है टैक्स
छह स्थानों पर लगे कैमरे का टैक्स करीब चार लाख रुपये हुआ है। जिसमें से 70 फीसदी टैक्स पुलिस महकमे की ओर से अप्रैल में अदा भी किया गया है। बाकी की रकम अदायगी के बाद ही आगे के कैमरों पर पुलिस महकमा पहल कर सकता है।
एजेंसी ने लगाई थी विज्ञापन की शर्त
सोशल वेलफेयर एजेंसी ने छह कैमरे लगाने के बाद विज्ञापन की शर्त लगा दी थी। कंपनी ने कैमरों को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी उठाते हुए यह कहा था कि इसके बदले उसे विज्ञापन की जगह भी चाहिए। यानी जहां पर कैमरे लगाए जाएंगे वहां पर विज्ञापन भी लगाया जाएगा। इसी के बाद एसएसपी ने नगर निगम को पत्र लिखा था।
सिर्फ दिखावे की रह गई है तीसरी आंख
जिन चौराहों पर कैमरे लगाए गए हैं, वहां पर भी अब यह काम नहीं कर रहे हैं। संस्था की ओर से मरम्मत काम नहीं कराया गया और न ही पुलिस अफसरों ने ही इस ओर ध्यान दिया है।
सीओ गोरखनाथ ने शुरू की जांच पड़ताल
सीओ गोरखनाथ चारु निगम ने अब पुलिस बूथ और चौराहों पर लगे कैमरे की जांच शुरू कर दी है। व्यापारी की हत्या और कुछ अन्य घटनाओं से सबब के बाद पुलिस ने सीओ को यह जिम्मा सौंपा है कि वह कैमरों की असल स्थिति बताएं।
अपराध बढ़ने पर बनी थी योजना
दो साल ताबड़तोड़ हो रहे अपराध के बाद कैमरे लगाए जाने की योजना बनाई गई थी। मगर अफसरों के तबादले और शर्तों के बीच में यह योजना पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतर पाई।
व्यापारियों से करेंगे संपर्क
प्रमुख बाजारों में व्यारियों द्वारा कुछ स्वयं के दुकानों के आगे कैमरे लगाए भी गए हैं। पुलिस का कहना है कि जहां पर कैमरे नहीं लगे हैं, वहां व्यापारियों के साथ बैठक कर कैमरे लगाने की पहल करेंगे। सीओ गोरखनाथ ने भी व्यापारियों से संपर्क कर कैमरे लगाने की योजना बना ली है।
थानों में पुलिस द्वारा कैमरे लगाए गए हैं। एजेंसी के कैमरे लगाए जाने की फाइल निकाली जा रही है। इस पर पहल करके जहां पर भी काम अटका होगा, उसे शुरू कराने की कोशिश की जाएगी। कोशिश होगा कि शहर के सभी प्रमुख चौराहे सीसी कैमरे की जद में हों।
गणेश साहा, एसपी सिटी
व्यापारियों ने लगवाएं है 67 कैमरे
पुलिस की पहल पर 67 कैमरे व्यापारियों ने लगाए हैं। भालोटिया मार्केट, साहबगंज, गोलघर, घंटाघर, नखास चौक, अग्रसेन तिराहा, असुरन पर व्यापारियों की ओर से कैमरे लगाए गए हैं। इसमें से ज्यादातर कैमरे चालू हालत में है और इनसे अपराधियों को पकड़ने में मदद भी मिली है।