डेंजर जोन चार और पांच में भी अब भूकंप आने पर भवन नहीं गिरेंगे। यह दावा है मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. श्रीराम चौरसिया का। उनका कहना है नींव की दो प्रकार की संरचनाओं को जोड़कर ऐसी संरचना बनाई जा रही है, जिससे भवन भूकंप के दौरान भी सुरक्षित रहें।
डॉ. चौरसिया का कहना है कि भूकंप की दृष्टि से नेपाल से सटे तराई वाले क्षेत्र ही नहीं गोरखपुर और दिल्ली भी डेंजर जोन चार में आते हैं। इस जोन में भूजल का स्तर पर पहले से ही काफी ऊपर है।
ऐसी स्थिति में भूकंप से होने वाले कंपन से जमीन के छिद्रों से निकले वाले पानी के दबाव से मिट्टी की कठोरता समाप्त हो जाती है। मिट्टी का सख्त स्वरूप परिवर्तित हो कर तरल होने लगता है, जिससे नींव कमजोर होती है और इमारत गिर पड़ती है।
ऐसे भवनों को भूकंप के समय भी सुरक्षित रखने के लिए नींव की दो प्रकार की संरचनाओं को जोड़कर ऐसी संरचना बनाई गई है, जिससे जमीन के नीचे की मिट्टी की संरचना में होने वाले परिवर्तन का असर कम से कम हो।
उन्होंने बताया कि शोध में पाया गया कि इस कंस्ट्रक्शन डिजाइन से जमीन के छिद्रों से निकलने वाले पानी का दबाव बहुत असरकारक नहीं रहता है। लिहाजा भवन पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहता है। दूसरे इस तरह की प्रक्रिया अपनाने पर बहुत खर्च भी नहीं आता। बताया कि इस विधि पर साल भर से काम चल रहा है।