अब एआरपी सुधारेंगे शिक्षा की गुणवत्ता
विवेक सिंह
गोरखपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई के परिणाम (लर्निंग आउटकम) बढ़ाने और स्कूलों की निगरानी की कमान एकेडमिक रिर्सोस पर्सन (एआरपी) के हाथों में होगी। जिले के हर ब्लॉक पर हिंदी, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और अंग्रेजी के पांच-पांच कुल 100 एआरपी तैनात किए जाएंगे। सभी ब्लॉक के एआरपी को मिलाकर जिला स्तर पर एकेडमिक रिर्सोस ग्रुप का गठन किया जाएगा।
इच्छुक शिक्षक 12 नवंबर तक आवेदन पत्र भरकर बेसिक शिक्षा विभाग में जमा करा सकते हैं। वहीं विभाग में कार्यरत एनपीआरसी समन्वयकों और एबीआरसी (सह समन्वयकों) को उनके मूल विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए वापस भेजा जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी करने को सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2002-03 से एबीआरसी और एनपीआरसी नियुक्त किए गए थे। एबीआरसी (सह समन्वयक)को स्कूलों में जाकर शैक्षणिक गुणवत्ता सहित अन्य व्यवस्थाएं देखने के निर्देश दिए गए थे।
इनके अलावा एनपीआरसी संकुल प्रभारी भी जिम्मेदारी दी गई थी। मगर इनके विद्यालयों में न जाने और दफ्तर में अधिकारियों की तरह जमे रहने की शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग को लगातार मिल रही थी। मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद से ही प्रदेश सरकार ने दोनों ही पदों को समाप्त करते हुए इनकी जगह एआरपी को तैनात करने की हरी झंडी दे दी।
लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से होगा चयन
एआरपी के चयन के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इसमें डायट प्राचार्य, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) और वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। समिति एआरपी चयन के लिए आवेदन आमंत्रित करने के साथ ही विषयवार लिखित परीक्षा कराएगी।
समिति प्रश्न पत्र तैयार कराने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था भी करेगी। विषयवार माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन के लिए मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। लिखित परीक्षा 60 अंक की होगी। माइक्रो टीचिंग-शिक्षण प्रदर्शन के 30 अंक और 10 अंक का साक्षात्कार होगा। लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही माइक्रो टीचिंग-शिक्षण प्रदर्शन के लिए पात्र होंगे। माइक्रो टीचिंग में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले ही साक्षात्कार के लिए पात्र घोषित किए जाएंगे।
मेरिट आधार पर मिलेगी तैनाती
साक्षात्कार में भी 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही अंतिम चयन के लिए पात्र होंगे। लिखित परीक्षा, माइक्रो टीचिंग और साक्षात्कार में कुल 60 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की बतौर एआरपी चयन के लिए मेरिट तैयार की जाएगी। इनका पदस्थापन काउंसलिंग के माध्यम से मेरिट या वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा।
एक से तीन वर्ष होगा कार्यकाल
एआरपी का कार्यकाल 1 वर्ष का होगा। हर साल उनकी परफार्मेंस के आधार पर जिला स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर नवीनीकरण किया जाएगा। अधिकतम 3 वर्ष कार्यकाल रहेगा। तीन वर्ष के बाद दोबारा चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। एआरपी को स्कूलों का पर्यवेक्षण करने के लिए हर महीने 2500 रुपये और डायट मेंटर को 1000 रुपये वाहन भत्ता दिया जाएगा।
एआरपी का वार्षिक मूल्यांकन बीएसए और डायट प्राचार्य द्वारा गठित समिति से कराया जाएगा। समिति की रिपोर्ट के बाद सीडीओ एआरपी का कार्यकाल बढ़ाने की स्वीकृति देंगे। वार्षिक मूल्यांकन में संबंधित ब्लॉक के मेंटर को भी सदस्य बनाया जाएगा।
एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के कार्य
- एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को हर महीने की 28 तारीख को अगले महीने की कार्ययोजना और भ्रमण कार्यक्रम जिला समन्वयक-प्रशिक्षण के जरिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं डायट प्राचार्य के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
- प्रत्येक एआरपी को हर महीने कम से कम 30 स्कूलों, डायट मेंटर को 10 स्कूलों, केजीवीसी को दो स्कूलों का प्रेरणा एप के माध्यम से ऑनलाइन सुपरविजन करना होगा।
- एआरपी लर्निंग आउटकम पर आधारित बच्चों के अधिगम स्तर का आकलन का डाटा फीड कराएंगे। इन्हें विद्यालयवार और छात्रवार उपलब्धि रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- विद्यालय निरीक्षण के दौरान संवेदनशील मुद्दों लैंगिक समता-समानता, जीवन कौशल शिक्षा, पर्यावरण संवेदना, सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आत्मरक्षा और बाल अधिकार पर विचार-विमर्श करेंगे।
- ब्लॉक स्तर पर नवाचारी एवं बेहतर शिक्षण अधिगम कार्य करने के लिए शिक्षकों का समूह विकसित किया जाएगा।
- जिलों में शैक्षिक गुणवत्ता में वृद्धि एवं शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार, प्रतियोगिताओं और रैलियों का आयोजन करेंगे।