फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुसीबत बना रेलवे का विकल्प

विज्ञापन
ट्रेन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

विज्ञापन
राजन राय
गोरखपुर।
ट्रेन में ज्यादा वेटिंग देखकर अगर आपने कंफर्म बर्थ के लिए विकल्प का जरिया चुना है तो संभव है कि आपकी यात्रा मुसीबतों भरी हो जाए। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें विकल्प वाली ट्रेनें मुसीबत बन गई हैं। ताजा उदाहरण बरेली स्टेशन का है। यहां से एक यात्री ने गोरखपुर के लिए बाघ एक्सप्रेस के एसी कोच में रिजर्व टिकट बुक कराया। वेटिंग होने के चलते यात्री ने विकल्प का सहारा लिया। श्री वैष्णो देवी कटरा-कामाख्या एक्सप्रेस में उनकी बर्थ आरक्षित हुई जो 17 घंटे बाद आई। ट्रेन का इंतजार तो भारी पड़ा ही सफर भी काम का न रहा। ऐसे बहुत से यात्री हैं जिन्हें विकल्प वाली ट्रेनों के चलते परेशानी उठानी पड़ रही है।

रिजर्वेशन फॉर्म में विकल्प का कॉलम नहीं
गोरखपुर। काउंटर से टिकट बुक कराने के लिए भरे जाने वाले आरक्षण फॉर्म में विकल्प का कॉलम ही नहीं है, जबकि कंप्यूटर में ऑप्शन मौजूद है। मुश्किल यह है कि सुविधा पाने के लिए यात्री का मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। बगैर इसके टिकट ही नहीं बनेगा। लिहाजा बुकिंग क्लर्क भी विकल्प का ऑप्शन देने से परहेज कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर किसी यात्री ने सुविधा न लेने की बात कहकर शिकायत कर दी तो इसका जवाब कैसे देंगे, क्योंकि नियम है कि आरक्षण फॉर्म में जो कॉलम है, उसी को दर्ज करना है।
विज्ञापन


एक महीने में सिर्फ तीन टिकट बने
गोरखपुर। आरक्षण काउंटर से विकल्प की सुविधा एक महीने पहले शुरू हुई है। रेलवे स्टेशन स्थित आरक्षण केंद्र से सिर्फ तीन यात्रियों ने ही टिकट बनवाए हैं। इन यात्रियों ने आरक्षण फॉर्म पर लिखकर सुविधा मांगी है।
विज्ञापन


कोट
यात्रियों की सहूलियत के लिए ही विकल्प शुरू किया गया है। सुविधा का लाभ लेना यात्रियों की मर्जी पर है। इसमें अगली ट्रेन में कंफर्म टिकट यात्रियों को मिल जाता है। आरक्षण काउंटर से टिकट बुक कराने में भी विकल्प की सुविधा यात्रियों को दी जा रही है। फॉर्म में भी विकल्प का कॉलम जल्द प्रिंट करा दिया जाएगा।
- संजय यादव, सीपीआरओ, एनईआर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें