एक तरफ जहां गर्मी बढ़ने से हर तरफ पानी की किल्लत शुरू हो गई हैं, वहीं शहर में हर रोज 20 लाख लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। यह दावा किया है नगर निगम ने। निगम के आंकड़ों के हिसाब से प्रत्येक दिन 103 एमएलडी (मिलियन लीटर/ दिन) पानी भूगर्भ से निकाला जाता है, लेकिन पाइपलाइन में लीकेज आदि की वजह से 15 से 20 लाख लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
शहर में 1.25 लाख मकान हैं। नगर निगम अब तक इनमें से तकरीबन 60 प्रतिशत मकानों तक ही पानी की सप्लाई की व्यवस्था कर सका है। हालांकि काफी लोगों ने इसके लिए अवैध कनेक्शन ले रखा है। इन तमाम लोगों को नगर निगम तकरीबन 140 ट्यूबवेल के जरिए प्रतिदिन करीब 103 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई करता है, लेकिन विभिन्न स्थानों पर पाइपलाइन के लीकेज, हर वक्त बहते वाटर स्टैंड पोस्ट और लगातार हो रही टूट-फूट से लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
नगर निगम के अधिकारी भी इस मसले को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं और उसे रूटीन प्रक्रिया करार देते हैं। ऐसे में जब चारों ओर पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, ऐसे में पानी की बर्बादी चिंता का सबब है।
विभाग यह मानकर चलता है कि सप्लाई किए गए पानी का तकरीबन 20 प्रतिशत पानी किसी न किसी रूप में इस्तेमाल नहीं हो पाता है। लीकेज, वाटर स्टैंड पोस्ट आदि से ये लीकेज होते हैं। मानक के अनुसार भी इतना लीकेज होना माना जाता है। हालांकि विभाग किसी भी लीकेज को जल्द से जल्द ठीक कराने का प्रयास करता है।
- पीएन मिश्रा, सहायक अभियंता, जलकल
पाइपलाइन लगाने के दौरान ही लीकेज आदि की बात सामने आती है। इसके बाद माना जाता है कि ट्यूबवेल के जरिए निकाला गया पानी बिना किसी बर्बादी के लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। सामान्य लीकेज तो संभव है, लेकिन पानी की इतनी बर्बादी नहीं होती है।
- डीपी मिश्रा, अधिशासी अभियंता, जल निगम