गोरखपुर।
हिंदू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतराें में नाथ संप्रदाय का प्रमुख स्थान है। भारत वर्ष के अलावा नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भी नाथ संप्रदाय के योगियों ने अपनी साधना और तत्वज्ञान से वहां की भूमि को पवित्र किया है। देश के कोने-कोने में स्थित नाथ संप्रदाय के तीर्थ स्थल, मंदिर, मठ, आश्रम, दलीचा, खोह, गुफा व टीले इसके प्रमाण हैं कि नाथ संप्रदाय लोकप्रिय पंथ है। इसके अनुयायी आज भी देश व विदेश में पंथ की परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं।
गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी का कहना है कि नाथ संप्रदाय की उत्पत्ति आदिनाथ भगवान शिव द्वारा मानी जाती है। इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि नाथ संप्रदाय भारत वर्ष के गौरवशाली, क्रांतिकारी इतिहास में रचा-बसा है और महलों से लेकर कुटियों तक फैले संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। नाथ संप्रदाय की मान्यता के अनुसार गोरखनाथ जी सतयुग में पेशावर, त्रेता में गोरखपुर, द्वापर में द्वारिका तथा कलयुग में गोरखमढ़ी सौराष्ट्र में उत्पन्न हुए थे।
गोरखनाथ मंदिर के स्मृति सभागार की दीवारों पर मानचित्र बनाकर यह दर्शाया गया है कि देश व विदेश में कहां-कहां नाथ पंथ के मठ-मंदिर हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ योग धारण करने के दौरान काफी समय तक पेशावर स्थित नाथ पंथ के मठ में रहे थे। बाद में वह भ्रमण करते हुए गोरखपुर आए और यहीं के होकर रह गए।
इन स्थानों पर हैं मठ
नेपाल में अमरस्थली, गोरखनाथ मंदिर
अफगानिस्तान के जलालाबाद में गोरखनाथ मंदिर
पाकिस्तान में गोरक्ष टिला, सिद्ध वीरनाथ समाधि स्थल
जम्मू-कश्मीर में जंबू गुफा मंदिर
हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में बाबा मस्तनाथ मठ
राजस्थान में गोरखनाथ चरणपादुका, जालंधरनाथ मंदिर
गिरीनार पर्वत पर गोरखनाथ धुना
महाराष्ट्र में त्रयंबकेश्वरनाथ मंदिर, गोरखनाथ गुफा
कर्नाटक में गोरक्षनाथ मंदिर, सिद्ध भैरव धुना
उड़ीसा में चारु सिद्धकुंड, गोरख चरण पादुका
मध्यप्रदेश में भर्तहरि गुफा