फोटो-19-गोंडा में भगहरिया पूरेमितई गांव के पंचायत भवन का सभागार। -संवाद
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गोंडा। जिले की छह सौ से अधिक पंचायतें ऐसी हैं, जिन्होंने अभी तक पंचायत भवनों के लिए संसाधन नहीं खरीदे हैं। जबकि करीब साढ़े दस करोड़ रुपये का बजट इनके पास है। शासन का जोर है कि पंचायत भवनों में सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर, फर्नीचर आदि हों। आम लोगों को मामूली कामों के लिए दौड़भाग न करनी पड़े। पंचायत सहायक उनके कार्यों में सहयोग करें। बैंकिंग कार्य के लिए बीसी सखी भी रहें। पंचायत भवनों से ही सरकार की योजनाओं का लाभ देने की पहल होनी है। मगर पंचायतें इसमें लापरवाही बरत रही हैं। पंचायत भवनों के संसाधनों से लैस न होने से कार्यों में कठिनाई आ रही है।
पंचायतीराज को सशक्त बनाने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले ही शासन ने कार्रवाई तेज कर दी थी। 1,214 पंचायतों में छह हजार रुपये मानदेय पर पंचायत सहायकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जिसमें 1,128 पंचायतों में सहायकों की नियुक्ति अब तक हो चुकी है। इसके अलावा कुछ मामले विवादों में होने के कारण चयन नहीं हो सके हैं। पंचायत भवनों को सीसीटीवी कैमरों से लैस करने के साथ ही पर्याप्त फर्नीचर भी क्रय करना था। अभी तक 50 फीसदी पंचायतों ने ही सामग्री का क्रय किया है। इन्वर्टर व बैटरी भी लेनी थी। इसके लिए प्रत्येक पंचायत को 1.75 लाख रुपये का बजट खर्च करना है। विभाग की रिपोर्ट को मानें तो अभी तक छह सौ से अधिक पंचायतों ने सामग्री का क्रय नहीं किया है। इन पंचायतों के पास सामग्री क्रय करने के करीब दस करोड़ 50 लाख रुपये का बजट डंप है। मगर पंचायतों की लापरवाही से कामकाज शुरू नहीं हो सका है। इससे पंचायतीराज की योजनाओं का लाभ पाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। शासन ने जल्द से जल्द सामग्री क्रय करने की प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया है। जिससे आम लोगों को उनके गांव में ही सरकार की योजनाओं से जोड़ा जा सके।
योजनाओं का लाभ पाने को चक्कर काट रहे गरीब
पंचायतों में विभिन्न सरकारी योजनाओं से पात्रों को जोड़ने की मुहिम सही ढंग से शुरू नहीं हो सकी है। छह सौ के करीब पंचायतें तो हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। इससे आम लोगों को विकास भवन व ब्लॉक मुख्यालय तक दौड़ना पड़ रहा है। इसके अलावा निजी लोकवाणी केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत भवनों को व्यवस्थित करके आम लोगों को घर बैठे ही सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाना है। इसके लिए पंचायतों को निर्देश भी दिए गए हैं। मगर इस पर अमल नहीं हो रहा है।
पंचायतों को सशक्त बनाने की मुहिम चल रही है। पंचायत भवनों को संसाधनों से लैस करने के लिए प्रक्रिया हो रही है। जहां प्रक्रिया रुकी है, वहां के लिए निर्देश दिए गए हैं।
शशांक त्रिपाठी, सीडीओ