गोंडा। जिले के लोगों को सुलभ व निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देय से बने सरकारी अस्पताल बदहाली के कगार पर हैं। यहां आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों की भांति ही महंगी जांच व दवाओं का बोझ उठाना पड़ता है। जिला अस्पताल में सप्ताहभर से एक्सरे मशीन खराब है।
हर रोज दर्जनों मरीजों को बाहर एक्सरे करवाना पड़ रहा है। इसमें सात सौ रुपये से एक हजार तक देने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में कौड़िया बाजार से आई फूलमती को कंधे का एक्सरे कराना था, लेकिन एक्सरे मशीन खराब होने से बाहर कराना पड़ा।
हलधरमऊ से आए जगदीश प्रसाद को डॉक्टर ने सीने का एक्सरे कराने को कहा था, लेकिन उन्हें भी मायूस होकर बाहर एक्सरे कराना पड़ा। आवास विकास कॉलोनी निवासी अर्जुन पांडेय का भी हाथ का एक्सरे नहीं हो पाया। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में निशुल्क इलाज का दावा खोखला साबित हो रहा है।
यहां इलाज कराने आए मरीजों को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र के बाहर पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। कहने को तो इस सीएचसी को कैसरगंज सांसद बृजभूषण सिंह ने गोद ले रखा है, लेकिन यहां एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं लग पाई।
मरीजों को अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे के लिए अस्पताल के बाहर जांच के लिये भटकना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. लवकेश शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में जरूरी मशीनों के न होने से गंभीर रोगियों के विभिन्न जांचों के लिये जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटियाथोक पर आने वाले मरीजों के एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए निजी पैथालॉजी का सहारा लेना पड़ता है। सीएचसी के अधीक्षक डा. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। रक्त, शुगर की जांच की जाती है।
मनकापुर सीएचसी पर एक वर्ष से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब है। सामान्य एक्सरे की फिल्म खत्म होने की बात कहकर मरीजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। एक्सरे टेक्नीशियन सुधा चौधरी ने बताया कि मैनुअल एक्सरे मशीन तो सही है, लेकिन एक माह से फिल्म न होने से एक्सरे नहीं हो रहा है।
डॉ. डीके भास्कर ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। पैथालॉजी लैब में संसाधन की कमी से ब्लड ग्रुप, एचआईवी, डेंगू की जांच नहीं हो पा रही है। शेष जांचे हो रही हैं। बायोकमेस्ट्री, इलेक्ट्रालाइट, कम्प्लीट ब्लड काउंटर की नई मशीन आईं है, लेकिन अभी इंस्टाल नहीं हुई है।
सीएचसी छपिया में अल्ट्रा साउंडमशीन नहीं है। एक्स-रे मशीन लगी है, लेकिन टैक्नीशियन की तैनाती न होने से मशीन धूल फांक रही है। सीएचसी पर उपचार के लिए आए मरीजों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
जिसका फायदा उठा निजी पैथालॉजी वाले मनमानी फीस ले रहे हैं। सीएचसी में सीबीसी जांच की मशीन है, लेकिन सामान न होने से उसका कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है यहां दो स्थाई व दो संविदा के चिकित्सकों की ही तैनाती है।