मनकापुर (गोंडा)। कृषि विज्ञान केंद्र पर गुरुवार को विश्व दलहन दिवस मनाया गया। जिसमें किसानों को खेती संबंधी विभिन्न जानकारी दी गई। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार पांडेय ने कृषकों का आह्वान किया कि वह फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश अवश्य करें। दलहनी फसलें प्रोटीन का प्रचुर स्रोत हैं। इसके सेवन से मानव व पशु स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। डॉ. केके मौर्य प्राध्यापक कृषि अभियंत्रण ने बताया कि दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम की ग्रंथियां पायी जाती हैं।
डॉ. राम लखन सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक शस्य विज्ञान ने दलहनी फसलों में अरहर, चना, मटर, मसूर, उर्द, मूंग की खेती के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दलहनी फसलों में गंधक का प्रयोग अति आवश्यक है। डॉ. पीके मिश्रा वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि वानिकी ने वानिकी पौधों के साथ दलहनी फसलों की सहफसली खेती को अत्यंत उपयोगी बताया। डॉ. मनोज कुमार सिंह उद्यान वैज्ञानिक ने बागवानी फसलों, सब्जियों आदि के साथ दलहनी फसलों की सहफसली खेती की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बागवानी फसलों के छोटे पौधों के साथ दलहनी फसलों की बुवाई करने पर दलहनी फसलों से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। साथ ही मृदा की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होती है। दलहनी फसलों में कार्बनिक खादों का प्रयोग करने से गुणवत्ता युक्त उत्पादन प्राप्त होता है।