गोंडा। जिले में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। घर-घर में लोग वायरल बुखार से लोग तप रहे हैं, शहर से लेकर गांवों तक हर दिन वायरल बुखार के सैकड़ों मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की लगातार प्रयासों के बाद भी मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है।
दो नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है जिनका इलाज जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में चल रहा है। वहीं वायरल बुखार व डायरिया से पीड़ित 45 मरीज जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती कराए गए हैं। तथा चिल्ड्रेन में 19 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में भर्ती हर्षित (18) की जांच किए जाने पर डेंगू की पुष्टि हुई। वहीं तरबगंज के बेलसर निवासी इरसाद (28)की जांच रिपोर्ट मेें डेंगू पॉजीटिव पाया गया। अब तक जिले में 31 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इसके आधार पर संबधित क्षेत्रों के सीएचसी अधीक्षकों को अलर्ट कर दिया गया है।
वहीं वायरल बुखार और डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी बुखार के मरीजों की भरमार है। घर-घर में लोग बुखार से तप रहे हैं। वायरल बुखार व डायरिया का प्रकोप से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हैं।
सुुबह होते ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। बुखार की रोकथाम में स्वास्थ्य महकमा फेल हो गया है। तमाम कोशिशों के बाद भी मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है।
जिला अस्पताल में हर रोज करीब एक हजार लोग ओपीडी में इलाज कराने आते हैं जिसमें अधिकांश मरीज वायरल बुखार, टाइफाइड व डेंगू के लक्षण वाले होते हैं। नगर और ग्रामीण सीएचसी-पीएचसी का भी यही हाल रहा। बुखार के मरीजों में बच्चों, किशोर, किशोरियों व महिलाओं की संख्या अधिक है।
जिला अस्पताल के मरीजों की बढ़ रही तादात के कारण अस्पताल के मेडिकल वार्ड से लेकर चिल्ड्रेन वार्ड तक में बेड फुल हो चुके हैं। जिससे मरीजों को गैलरी में बेड लगाकर भर्ती करना पड़ रहा है। पुरुष मेडिकल वार्ड में 23 मरीज भर्ती हैं तथा महिला मेडिकल वार्ड में 22 मरीज भर्ती किए गए हैं जिसमें अधिकांश वायरल बुखार, मलेरिया, डायरिया तथा डेंगू के लक्षण वाले हैं।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि साफ सफाई व खान पान में संयम से वायरल व डेंगू से बचाव किया जा सकता है। उन्होने बताया कि उबला और साफ पानी पीएं तथा तरल और रेशेदार भोज्य पदार्थ ज्यादा लें।
बुखार होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर जांच जरूर कराएं, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। सफाई का विशेष ध्यान देते हुए अपने घर, दफ्तर में फ्रीज की ट्रे, कूलर, गमलों, टायरों, टंकियों और आसपास के गड्ढों में ज्यादा दिन तक एक ही पानी को जमा न होने दें।