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फर्जी जेल भेजने के मामले की होगी मजिस्ट्रेटी जांच

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गोंडा। कोतवाली पुलिस द्वारा एक युवक को दो दिन तक थाने में बैठाने व तमंचा व कारतूस बरामद दिखाकर जेल भेजने के मामले में नया मोड़ आ गया है। सीओ कैसरगंज बहराइच की जांच पर आईजी ने एसपी गोंडा को कार्रवाई के लिए जो निर्देश दिए थे, उसपर विराम लग गया है।
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श्रम व सेवा योजन मंत्री के आदेश के बाद डीएम ने एसडीएम करनैलगंज को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। जिस पर उप जिला मजिस्ट्रेट करनैलगंज ने जांच शुरू कर दी है। उप जिला मजिस्ट्रेट ने आरोपी कोतवाल समेत 11 पुलिसकर्मियों को बयान के लिए तलब किया है।
एक युवक को घर से पकड़ कर कोतवाली में बैठाए रखने एवं गलत ढंग से गिरफ्तार कर कट्टा लगाकर जेल भेजने के मामले में आईजी देवीपाटन मंडल ने एसपी गोंडा को विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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मामले में मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर कराई गई जांच में करनैलगंज पुलिस पर लगे आरोप सही पाए गए थे। आईजी ने कोतवाल करनैलगंज, दो उपनिरीक्षक, दो हेड कांस्टेबल एवं एक कांस्टेबल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक गोंडा को निर्देश दिया था।
आईजी देवीपाटन मंडल डॉ. राकेश सिंह ने एसपी गोंडा को भेजे गए आदेश में कहा था कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में आवेदक देवेंद्र प्रताप सिंह निवासी कोतवाली करनैलगंज क्षेत्र के भतीजे अद्रोण प्रताप सिंह उर्फ राजवीर सिंह को कोतवाली करनैलगंज पुलिस द्वारा गलत ढंग से उसके घर से गिरफ्तार कर तमंचा दिखाकर जेल भेजने के लिए बात कही गई थी।
जिसकी जांच परिक्षेत्र के किसी अन्य जनपद से कराए जाने की मांग की गई थी। जिसके संबंध में कमलेश कुमार सिंह पुलिस क्षेत्राधिकारी कैसरगंज बहराइच द्वारा जांच कराई गई। जिसमें पाया गया कि अद्रोण प्रताप सिंह को 12 अगस्त की रात्रि में उसके घर से करनैलगंज की पुलिस थाने पर लेकर गई तथा उपनिरीक्षक कौशल किशोर भार्गव, उप निरीक्षक बृजेश कुमार गुप्ता, हेड कांस्टेबल गिरजा शंकर, हेड कांस्टेबल राजू सिंह व कांस्टेबल सत्येंद्र कुमार द्वारा दिनांक 14 अगस्त को चचरी मार्ग पर बीबियापुर अवधूत नगर को जाने वाले तिराहे पर गिरफ्तारी व एक अदद तमंचा, एक अदद जिंदा कारतूस 12 बोर दिखाते हुए आर्म्स एक्ट का मुकदमा पंजीकृत किया था।
इस कार्रवाई को कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह की जानकारी में किया गया। अद्रोण प्रताप सिंह को अनधिकृत रूप से थाने में रखने व मुकदमा पंजीकरण के प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।
आईजी ने आदेश में लिखा है कि पुलिस अधीक्षक बहराइच द्वारा भेजी गई जांच आख्या में दोषी पाए गए अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इस कार्रवाई के बाद मामले में फंसे पुलिसकर्मियों के परिजनों की मांग पर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने आयुक्त देवीपाटन मण्डल को पत्र लिखकर घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के कहा है।
जिसपर आयुक्त ने डीएम गोंडा को पत्र भेजकर एसडीएम करनैलगंज से जांच कराने के निर्देश दिए। जिसपर एसडीएम ने जांच शुरू कर दिया है। एसडीएम हीरालाल ने बताया कि जांच के संबंध में कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक व पीआरबी 112 की टीम समेत 11 पुलिसकर्मियों के बयान लेने के लिए पत्र भेजा गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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