गोंडा। आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के सात लाख लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाना जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। तीन लाख परिवारों के दस लाख सदस्यों को निशुल्क इलाज के लिए योजना से जोड़ा जाना था, लेकिन अभी तक 2 लाख 75 हजार लोगों का ही गोल्डन कार्ड बन सका।
जिलाधिकारी ने खुद कमान संभालते हुए अपनी निगरानी में गोल्डन कार्ड बनाने को छह हजार कर्मचारी लगाए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आरोग्य मित्रों के साथ आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व जनसेवा केंद्र संचालकों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लगाया गया है।
आयुष्मान योजना के तहत फ्री इलाज पाने के लिए गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिले में 2,92,945 परिवारों के करीब दस लाख सदस्यों को आयुष्मान योजना का लाभार्थी माना गया है।
योजना शुरू होने के चार साल बाद भी कुल 2 लाख 75 हजार लोगों ने ही गोल्डन कार्ड बनवाए हैं। वहीं 7 लाख 25 हजार लोगों का शेष हैं। स्वास्थ्य छूटे हुए लोगों को गोल्डन कार्ड से आच्छादित करने के लिए विभाग आशा वर्कर को घर-घर भेजकर पंचायतों में खोले गए जनसेवा केंद्रों पर भेजकर गोल्डन कार्ड की संख्या बढ़ाने को प्रयास कर रहा है। योजना में चयनित परिवार को पांच लाख रुपये तक का सालाना स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा।
जिले में गोल्डन कार्ड बनाए जाने का कार्य तेजी से चल रहा है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो, पैनल निजी अस्पतालों के साथ 700 जनसेवा केंद्रो पर गोल्डन कार्ड निशुल्क बनाए जा रहे है। आयुष्मान योजना के तहत योजना में शामिल आमजन नजदीकी सीएससी पर गोल्डन कार्ड बनवा सकते हैं।
योजना में अपना नाम चेक करने के लिए विभाग की वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर डालकर राज्य, जिला सर्च करके अपना नाम देख सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आरोग्य मित्रों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कर्मियों व ग्राम प्रधानों को लगाया गया है। अंत्योदय कार्ड धारक 64,634 लोगों को भी योजना में शामिल कर गोल्डन कार्ड बनाया जा रहा है।