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Gonda News: मैं उन्हीं राम का सेवक हूं, तुम जिनसे बैर बढ़ाए हो

Sun, 18 Oct 2026 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। शहर के मालवीय नगर में आयोजित रामलीला में शनिवार को रावण और हनुमान के बीच हुए संवाद को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। बाद में हनुमान ने सोने की लंका को जला दिया।
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इससे पूर्व उन्होंने अशोक वाटिका पहुंचकर माता सीता से भेंट की। वाटिका में फल खाने के दौरान राक्षसों से हुए युद्ध का हास्यपूर्ण मंचन देखकर दर्शक प्रफुल्लित हो उठे। अक्षय कुमार के वध के बाद मेघनाद द्वारा हनुमान को नागपाश में बांधकर रावण के दरबार में पेश करने पर दोनों के बीच रोमांचक संवाद हुआ। रावण ने पूछा-
‘तू कौन, कहां से आया है, कुछ अपनी बात बता बनरे।
उद्यान उजाड़ा क्यों मेरा, क्या कारण था बतला बनरे।
लंका के राजा का तूने, क्या नाम कान से सुना नहीं?
तू इतना ढीठ निरंकुश है, मेरे प्रताप से डरा नहीं।
मारा है अक्षकुवंर मेरा, तेरा क्यों न संहार करूं।
तू ही न्यायी बनकर कह दे, तुझसे कैसा व्यवहार करूं?
रावण के इन प्रश्नों का उत्तर हनुमान जी ने इस प्रकार दिया-
‘दशमुख की प्रश्न-पुस्तिका के, पन्ने मैं क्रम से लेता हूं।
तुमने जो पूछा सर्वप्रथम, उसका ही उत्तर देता हूं।
सच्चिदानंद सर्वदानंद, बल बुद्धि ज्ञान सागर हैं जो।
रघुवंश शिरोमणि राघवेंद्र, रघुकुल नायक रघुवर हैं जो।
जो दशरथ अजर बिहारी हैं, कहलाते रघुकुल भूषण हैं।
रीझी थी जिन पर सूर्पणखा, हारे जिनसे खर-दूषण हैं।
फिर और ध्यान दे लो जिनकी, सीता को हरकर लाए हो।
मैं उन्हीं राम का सेवक हूं, तुम जिनसे बैर बढ़ाए हो।
रावण की सभा में हनुमान जी की निडरता देखकर पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। लंका विध्वंस के साथ रामलीला का विश्राम हुआ। लंका को सुनहरे रंग की झालरों से सजाया गया था। रामलीला में आए श्रद्धालुओं का अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह एवं संरक्षक अरुण कुमार शुक्ल ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अमर किशोर कश्यप, संजय तिवारी, धीरेंद्र प्रताप पांडेय, रामगोपाल साहू, हरीश शुक्ल, राजेश तिवारी, अलंकार सिंह, गोपेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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