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पंचायत चुनाव में राजघराने का दबदबा कायम

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गोंडा। छोटे चुनाव में बड़ों का दबदबा कायम है। राजनैतिक घरानों से जुड़े दो प्रभावशाली नेताओं के सक्रियता के चलते उनके क्षेत्र से जुड़े तीन प्रधान व तीन बीडीसी सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। इसमें से दो प्रधान व तीन क्षेत्र पंचायत सदस्यों का निर्वाचन निर्विरोध हो चुका है। एक प्रधान के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा होना बाकी है।
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विकासखंड करनैलगंज में गांव की सरकार के गठन में भी प्रदेश स्तरीय राजनीति में सक्रिय दो राजनीतिक घरानों का दबदबा साफ दिखाई पड़ रहा है। इसमें वर्तमान विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया की दो ग्राम पंचायत ग्राम कूरी एवं कटरा शहवाजपुर शामिल हैं।
जिस पर पंचायती राज गठन होने के बाद से लगातार इनका दबदबा कायम बना है। इसके चलते ही वर्तमान में हो रहे पंचायत चुनाव में भी प्रधान व बीडीसी का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। इसमें कटरा शहबाजपुर ग्राम पंचायत से राम तीरथ यादव और इसी ग्राम पंचायत से क्षेत्र पंचायत सदस्य के बतौर सुचेता पत्नी सुग्रीव और गांव ग्राम कूरी से क्षेत्र पंचायत सदस्य तिलका पत्नी तिलकराम का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
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इस ग्राम पंचायत से राजघराने द्वारा दो नामांकन कराया गया था। जिससे अभी किसी नामांकन की वापसी या नामांकन खारिज करने की कार्रवाई नहीं हुई है। जिससे निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा भी नहीं हो पाई है। इसके बावजूद प्रधान पद के लिए निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।
दूसरी तरफ पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह के पैतृक गांव ग्राम भंभुआ में भी ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य का निर्विरोध निर्वाचन तय है। इसमें प्रधान पद के लिए रामसरन यादव एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए सुनीता पत्नी शिव कुमार का निर्विरोध निर्वाचन होना है।
यहां किसी अन्य प्रत्याशियों द्वारा नामांकन नहीं किया गया। इन दोनों ग्राम पंचायतों में निर्विरोध निर्वाचन का सिलसिला कोई नया नहीं है। कई बार इन सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। जहां दोनों घरानों का दबदबा बहुत सालों से कायम है।
मगर मजे की बात यह है कि क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लाक प्रमुख) की सीट के लिए दोनों राजनीतिक घरानों ने कवायदें शुरू कर दी गई हैं और ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी के लिए जो नाम सामने आने वाले हैं उनका निर्विरोध निर्वाचन माना जा रहा है। इससे साबित होता है कि इलाके के इन दो राजनीतिक घरानों का दबदबा गांव की सरकार बनाने में लगातार कायम है।
पंचायत की सियासत में प्रभाव रखने वाले दोनो घरानों ने जिला पंचायत सदस्य के पदों से दूरी बनाए रखी है। भाजपा ने तो पहले ही सूची जारी कर भाजपा के बड़े नेताओं को झटका दे दिया था।
भाजपा ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र गोस्वामी के निधन के बाद उनके बेटे को टिकट को और एक अन्य सीट से संगठन के एक कद्दावर पदाधिकारी के रिश्तेदार को टिकट दिया गया है। सपा का संगठन भी इससे पीछे नही रहा। करनैलगंज में तीन सीटें अनारक्षित थीं, फिर भी एक अनारक्षित सीट से पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी को उतार कर पूर्व मंत्री के ब्राह्मण चेहरे को आगे लाने की कवायद पर पानी फेरा गया है।
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव से ही जिला पंचायत अध्यक्ष का निर्वाचन होता है। करनैलगंज क्षेत्र का अध्यक्ष जिला पंचायत के पद पर अहम प्रभाव रहा है। पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी भी जा चुकीं हैं। इस बार करनैलगंज में भाजपा व सपा की ओर से टिकट अध्यक्ष जिला पंचायत को साध कर ही दिया गया है। करनैलगंज तृतीय से भाजपा ने पार्टी से मनकापुर चतुर्थ से प्रत्याशी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीयूष मिश्रा के रिश्तेदार को टिकट दिया है।
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