फोटो- 13- गोंडा के छपिया बीआरसी पर प्रदर्शन करते अनुदेशक
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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय बढ़ोतरी का फैसला प्रदेश सरकार ने किया है। दो हजार रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई। इस फैसले से अनुदेशक आहत हैं और साल 2017 में तय किये गये 17 हजार मासिक मानदेय को ही लागू करने की मांग दोहराई। अनुदेशकों ने बीआरसी छपिया पर प्रदर्शन कर सरकार के फैसले का विरोध किया।
बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, कार्य अनुभव गृह शिल्प, कंप्यूटर शिक्षा, फल संरक्षण एव उद्यान विषय में नियुक्त अंशकालिक अनुदेशकों को 2013 से सात हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्य किया जा रहा था। साल 2017 में प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड से 17000 रुपये मासिक मानदेय वृद्धि का आदेश हुआ। जिसमें पूर्ववर्ती सरकार ने 1470 रुपए बढ़ाकर अनुदेशकों का मानदेय 8470 रुपए किया। वर्तमान सरकार में रहीं तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने विधानसभा में 9800 रुपए की घोषणा की। पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष स्वदेश कुमार मिश्र का कहना है कि शोषण की मंशा रखने वाली सरकार ने 2019 में मिल रहे 8470 मानदेय से बड़े 1470 रुपए की रिकवरी कर ली गई।
अनुदेशक संगठनों ने हाईकोर्ट लखनऊ याचिका में 2019 में मार्च 2017 से 17000 रूपये मानदेय भी 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देय करने का आदेश पारित किया। इसके बाद अनुदेशकों को मानदेय नही दिया गया। जिलाध्यक्ष स्वदेश कुमार मिश्र का कहना है कि अनुदेशकों के मानदेय का नुकसान करने के बाद अब दो हजार रुपये की वृद्धि करके छलावा है। संगठन के जिला महामंत्री अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि 1470 रुपये की रिकवरी कर दो हजार की बढ़ोतरी सरकार का चुनावी झुनझुने से अनुदेशकों में रोष व्याप्त है। उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने भी घोषणा को जुमला करार दिया और कहा कि मार्च 2017 में सरकार ने अनुदेशकों के मानदेय में 1470 की कटौती कर ली, अब जब चुनाव नजदीक है तो दो हजार की बढ़ोत्तरी का ऐलान किया जा रहा है। अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी विरोध जताया। मांग किया कि अनुदेशकों को नई शिक्षा नीति से नियमित किया जाए।