गोंडा। विश्व की समस्त स्त्रियों को माता, बहन मानकर उनका सम्मान करना चाहिए। जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। ये बातें शुक्रवार को वृंदावन धाम के ख्यातिलब्ध कथाकार पंडित राधेश्याम शास्त्री ने स्व. जुगल किशोर अग्रवाल की पावन स्मृति में रानी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
व्यास पीठ ने कहा कि धर्म ग्रंथों में सत्य बोलना, किसी का बुरा न सोचना, धार्मिक ग्रंथों का स्वाध्याय, अन्न दान व ईश स्तुति आदि धर्म के 30 लक्षण बताए गए हैं। व्यक्ति इनका पालन करके गृहस्थ जीवन में भी धर्मोचित कार्य कर सकता है। कहा कि नारी को स्वप्न में भी पराए पुरुष के बारे में नहीं सोचना चाहिए। पति ही उसका गुरु है। महिलाओं को ज्यादा गुरुओं के चक्कर में भी नहीं पड़ना चाहिए। व्यास पीठ ने कहा कि भारत की संस्कृति के समान विश्व के किसी भी देश की संस्कृति नहीं है। यहां जीते जी माता-पिता को भगवान मानते हैं और उनके न रहने पर भी चित्र लगाकर उनकी पूजा करते हैं। वर्ष में एक बार पितृ पक्ष में उनके पुण्य तिथि पर ब्राह्मण खिलाकर श्राद्ध करते हैं।
शास्त्रों की ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध के वक्त हमारे पूर्वज स्वयं अवतरित होकर अपना ग्रास ग्रहण करते हैं, और संतानों को आशीर्वाद देते हैं। शास्त्री जी ने कहा कि वनवास के समय जब भगवान राम ने राजा दशरथ का श्राद्ध करने के लिए गुरु वशिष्ठ को आमंत्रित करके भोजन कराया और विदाई के समय उन्हें प्रणाम करने के लिए सीता जी भी आईं तो उन्होंने अपना चेहरा ढक लिया।
भगवान राम ने उनसे पूछा कि गुरु जी से कैसा पर्दा? इस पर सीता ने जवाब दिया कि गुरु जी के चेहरे में आज मेरे ससुर जी दिखाई पड़ रहे हैं। कहा कि हमें अपने पितरों का श्राद्ध यथा शक्ति अवश्य करना चाहिए। यदि कुछ न मिले तो घास छीलकर गाय को खिला देने मात्र से हमें पुण्य मिलता है। इस मौके पर स्व. अग्रवाल की धर्मपत्नी सरोज अग्रवाल, पुत्रबधू रश्मि अग्रवाल, अनिल मित्तल, राजेन्द्र प्रसाद गाडिया, पूर्व विधायक तुलसीदास राय चंदानी, पूर्व चेयरमैन राजीव रस्तोगी, केके श्रीवास्तव एडवोकेट, राजा बाबू गुप्ता, डा. एचडी अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल पिण्टू, संजय अग्रवाल, विक्रम जी, कृष्णा गोयल, अतुल अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, रेनू अग्रवाल, अंशू अग्रवाल, अर्पिता अग्रवाल समेत सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे।