गोंडा। जूनियर हाईस्कूलों को मिले आत्मरक्षा प्रशिक्षण के बजट पर रार ठनी है। अनुदेशकों को दो हजार रुपये बतौर मानदेय का भुगतान होना है। प्रधानाध्यापक भुगतान पर चुप्पी साधे हैं। ऐसे में अनुदेशक मांग कर रहे हैं। बीते दिनों बेटियों को प्रशिक्षित करने के लिए बजट दिया गया था। जिले के 901 जूनियर हाईस्कूलों की करीब 50 हजार बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई प्रशिक्षण योजना से आत्मरक्षा के टिप्स दिए जाने थे। इसकेे लिए एक माह तक प्रशिक्षण चलना था। इसमें मानदेय दिए जाने में कई स्कूलों में आनाकानी हो रही है।
जूनियर हाईस्कूल में छात्राओं को प्रशिक्षण देने के लिए तीन- तीन हजार रुपये प्रति स्कूलों को दिए गए थे। जिसमें दो- दो हजार रुपये मानदेय पर और एक- एक हजार रुपये अन्य मद पर खर्च किया जाना था। बजट में ही व्यवस्था थी कि प्रशिक्षण देने वाले अनुदेशक या प्रशिक्षक को दो- दो हजार रुपये का मानदेय दिया जाना है। अब बजट का आवंटन हुआ तो स्कूलों के प्रधानाध्यापक मानदेय देने से कतरा रहे हैं।
वजीरगंज, मनकापुर आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण का मानदेय न दिए जाने का मामला सामने आया है। अनुदेशक संघ के पदाधिकारियों ने मानदेय दिए जाने का शासनादेश का हवाला देते हुए भुगतान की मांग किया है। इसके बाद भी कई ब्लॉकों में दिक्कत से विवाद की स्थिति बनी है। वहीं विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों को विवाद का हल करने का निर्देश दिया है। कई बीईओ को स्कूलों में ऐसे मामलों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशिक्षण के मद के बारे में सभी प्रधानाध्यापकों को जानकारी है। जहां से सूचना मिल रही है, वहां के बीईओ को बताया जा रहा है कि भुगतान में नियमों का पालन कराएं। भुगतान की रिपोर्ट ली जा रही है। - गणेेश गुप्ता, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा