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105 इलेक्ट्रिक इंजन मिलने से रेलवे को हर साल छह करोड़ की बचत

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गोंडा। जिले के रेलवे की ट्रेनों को इलेक्ट्रानिक इंजन से जोड़ दिया है। इससे हर साल अब छह करोड़ के अधिक की बचत हो रही है। पहले ट्रेनें डीजल इंजन से चलती थीं और इससे अधिक खर्च आता था।
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105 इलेक्ट्रानिक इंजन मिलने से 90 फीसदी ट्रेनों का संचालन डीजल इंजन से बंद हो चुका है। रेलवे के अधिकारियों की मानें तो इससे हर साल 18.50 लाख लीटर डीजल की बचत होगी और छह करोड़ रुपयों की बचत होगी। अभी आठ महीने से यह व्यवस्था लागू की गई है और ट्रेनों का संचालन तेज हुआ है।
रेलवे लोको शेड गोंडा विद्युतीकरण होने से हर साल साढे 18 लाख लीटर डीजल की बचत होने के साथ ही 6 करोड़ रुपये से अधिक ब रेलवे राजस्व की बचत हो रही है।
वर्तमान समय में लोको शेड में 105 इलेक्ट्रिक लोको है। लगभग 8 माह पहले रेलवे डीजल शेड को इलेक्ट्रिक लोको शेड में परिवर्तित कर दिया गया था। जिससे यह लोको शेड 90% प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। शेष 10% डीजल लोको मौजूद है, जिससे बलरामपुर व बहराइच मार्ग पर ट्रेनों का संचालन करने के लिए रखा गया है।
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जिस दिन बलरामपुर व बहराइच विद्युतीकरण हो जाएगा। डीजल शेड पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक सन 2019 और 2020 में ट्रेनों का संचालन करने के लिए 36 लाख 97 हजार 835 डीजल लगता था। जिसके एवज में 13 करोड़ 45 लाख 73 हजार 615 रुपये खर्च होता था।
मगर जबसे इलेक्ट्रिक लोको शेड हो जाने से प्रति वर्ष साढे 18 लाख लीटर डीजल की बचत के होने से 6 करोड़ से अधिक रुपये के खर्चा की बचत हो रही है। साथ ही शेड में प्रदूषण का भी काफी बचत होती है।
जिससे शेड में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहता है। इस संबंध में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन के अपर मंडल रेल प्रबंधक राघवेंद्र कुमार ने बताया है कि विद्युतीकरण होने से रेलवे को काफी लाभ हो रहा है।
डीजल तेल का दाम बहुत अधिक है। जबकि बिजली की दाम काफी कम है। एडीआरएम ने बताया कि आने वाले कुछ माह में गोरखपुर से वाया बलरामपुर होकर गोंडा तथा गोंडा से बहराइच का विद्युतीकरण हो जाने के बाद यह लोको शेड को शत प्रतिशत इलेक्ट्रिक लोको शेड हो जाएगा।
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