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एक करोड़ से बना प्लेटफाॅर्म बेकार

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गोंडा में रूट रिले इंटरलकिंग न होने से सूना पर प्लेटफार्म। (संवाद) - फोटो : GONDA
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गोंडा। रेलवे ने चार साल पहले बहराइच व बलरामपुर की सीधी रेल सेवा के लिए एक करोड़ की लागत से प्लेटफार्म नंबर चार व पांच का आधुनिकीकरण कराया था। मगर रूट रिले इंटरलॉकिंग का काम पूरा नहीं होने से इसका संचालन अभी भी अधर में है। इससे रेलवे को हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। चार साल से इंजीनियर लगे हैं लेकिन आज तक इंटरलॉकिंग का हल नहीं निकाल सके हैं। इस पर पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम सहित अधिकारियों ने नाराजगी जताई है।
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पूर्वोत्तर रेलवे के लिए गोंडा रेलवे यार्ड में बहराइच व बलरामपुर रेल मार्ग को जोड़ने व आरआरआई (रूट रिले इंटरलॉकिंग) का कार्य चुनौती साबित हो रहा है। पिछले चार वर्ष से लगातार रेलवे विभाग के प्रयास के बावजूद आरआरआई का कार्य शुरू नहीं हो सका है। जिस कारण से गोंडा रेलवे का विकास का कार्य बाधित हो रहा है। रेलवे ने 4 वर्ष करीब एक करोड़ की लागत से बहराइच व बलरामपुर से सीधे ट्रेनों का आवागमन करने के लिए नए प्लेटफार्म 4 व 5 बनाया था। इन प्लेटफार्मों पर ट्रेनों के आवागमन न होने से सन्नाटा छाया रहता है और बनवाया गया प्लेटफार्म बेकार है। इससे रेलवे को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। बता दें कि आज से 4 वर्ष पूर्व बहराइच व बलरामपुर छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तन करने के लिए लगभग एक करोड़ की लागत से गोंडा रेलवे स्टेशन पर नए प्लेटफार्म नंबर 4 व 5 बनाए गए थे। इन प्लेटफार्मों का उपयोग बहराइच व बलरामपुर से आने जाने वाली ट्रेनों का संचालन सीधे गोंडा होकर महानगरों के लिए किया जाना था। लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के उच्च अधिकारियों द्वारा पिछले 4 वर्ष वर्ष से इस प्लेटफार्म को बहराइच बा बलरामपुर रूट से जोड़ने के लिए व रूट रिले इंटरलॉकिंग का कार्य को गोंडा रेलवे यार्ड चुनौती साबित हो रहा है।
इस कार्य के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम, चीफ इंजीनियर व चीफ सेफ्टी ऑफिसर व अन्य अधिकारियों के साथ ही पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी भी गोंडा रेलवे यार्ड का आरआरआई के संबंध में दौरा कर चुके हैं। लेकिन अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि कब तक गोंडा रेलवे यार्ड में आरआरआई का कार्य शुरू हो पाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के प्रशासन के लिए गोंडा रेलवे यार्ड में आरआरआई न शुरू हो पाना चुनौती बन गया है। जिससे गोंडा रेलवे यार्ड का विकास का कार्य भी बाधित हो रहा है। साथ में 4 वर्ष पूर्व बने करोड़ों की लागत से बने प्लेटफार्म नंबर 4 व 5 ट्रेनों का आवागमन न होने से व प्लैटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहने से रेलवे को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया का नुकसान हो रहा है।
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इस कार्य के न होने से सबसे ज्यादा देवीपाटन मंडल वासियों को हलकान होना पड़ रहा है। इस संदर्भ में पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी का कहना है गोंडा रेलवे यार्ड की भूमि का नक्शा ही गड़बड़ है। जिस कारण से आरआरआई का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि दिसंबर माह तक रूट रिले इंटालॉकिंग का काम पूरा हो जाएगा।
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