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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले से सहमे लोग, 26 नए संक्रमित मिले

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जिला अस्पताल में टीका लगाती स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। कोरोना के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण से लोग सहमे से नजर आ रहे हैं। हर किसी के मन में संक्रमण के दूसरी लहर का खौफनाक दृश्य याद आने लगा है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी व उनके सहयोगी के कोरोना संक्रमित होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। रविवार को कोरोना संक्रमण के 26 नए मामले सामने सामने आए। जिसके साथ ही जिले में सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या 51 हो गई है।
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नए साल के पहले दिन से ही कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों ने जिले के लोगों की चिंता बढ़ानी शुरू कर दी। पहली जनवरी से हर रोज संक्रमण के मामले सामने आने लगे। रविवार को कोरोना संक्रमण के 26 नए मामले सामनेे आए जिससे जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या 51 हो गई है।
रविवार को अस्पतालों के साथ रेलवे स्टेशन, बस स्टाप व अन्य स्थानों पर 1209 लोगों की कोरोना जांच कराई गई जिसमें 26 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। कोरोना संक्रमितों को चिकित्सीय देखरेख के साथ होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। सक्रिय 51 लोगों में 46 लोग जिले में होम आइसोलेशन में हैं तथा पांच लोग जिले के बाहर निवास कर रहे हैं। वहीं कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए 189 लोगों की जांच कराई गई है।
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कोरोना संक्रमण के पिछली दो लहरों के दौरान कई कर्मचारी व पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण के शिकार हुए है। कई बार कार्यालय में आने वालों के संपर्क में आए अधिकारी व कर्मचारी भी संक्रमित हुए हैं।
इसी को देखते हुए जिले के प्रत्येक कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई थी। जिसमें बाकायदा थर्मल स्कैनिंग की भी व्यवस्था थी। लेकिन अब अधिकांश कार्यालयों से यह कोविड हेल्प डेस्क गायब है। यहां तक कि पुलिस कार्यालयों में भी यह डेस्क नहीं है।
कोविड गाइड लाइन का पालन कराने के लिए कोविड टास्क फोर्स का गठन किया गया था। लॉकडाउन से लेकर कोविड गाइड लाइन के एक-एक बिंदु पर प्रभावी कार्रवाई करना इस फोर्स की जिम्मेदारी थी।
टास्क फोर्स की ही देन थी कि कंटेनमेंट जोन में कोविड गाइडलाइन का पालन बेहद सख्ती से कराया गया। जिससे संक्रमण को फैलने से रोका गया। लेकिन मौजूदा समय में कोविड टास्क फोर्स का भी कुछ अता-पता नहीं है।
कोविड से बचाव के लिए पुलिस की ओर से अभी सख्ती भी नहीं की जा रही है। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों में लोग बेरोकटोक बिना मास्क के घूम रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और नाइट कर्फ्यू को लेकर भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। शहरों से लेकर गांवों तक में रात 10 बजे के बाद भी लोग बेवजह घूमते नजर आते हैं।
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