गोंडा। डेंगू मलेरिया व वायरल बुखार का प्रकोप जिले में तेजी से बढ़ रहा है। रोजाना बुखार के सैकड़ों मरीज उपचार के लिए सरकारी व निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल बुखार, मलेरिया तथा संभावित डेंगू के पीड़ित मरीजों की तादात तेजी से बढ़ रही है। जिले में अब तक डेंगू के नौ मरीजों की पुष्टि हुई है।
बदलते मौसम की वजह से जिले में वायरल बुखार तथा डेंगू की संभावना वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गांवों में हर रोज सैकड़ों लोग इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक में वायरल बुखार व डेंगू, मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की तादात बढ़ गयी है। हालांकि डेंगू के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग अधिकारियों के बताए गए आंकड़ों में भी भिन्नता मिलती है।
इससे स्पष्ट होता है कि विभाग डेगू के मरीजों को चिंहित नहीं कर पा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ मंजुला आनंद ने बताया कि अब तक जिले में नौ मरीजों में डेंगू के संक्रमण की पुष्टि हुई है लेकिन कितने मरीज सक्रिय हैं उनकी जानकारी नही है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी की माने तो जिले में सात मरीज डेंगू के पाए गए हैं वहीं विभाग के मुखिया सीएमओ डॉ आरएस केसरी ने बताया कि जिले में डेंगू के तीन मरीज मिले थे लेकिन अब सभी मरीज स्वस्थ हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए जन जागरूकता अभियान शुरू किया है।
स्वास्थ्य विभाग भले ही डेंगू फैलने से इन्कार करें, लेकिन सरकारी ही नहीं, तमाम निजी अस्पतालों में बिना एलाइजा टेस्ट के ही डेंगू के संदिग्ध मरीजों का उपचार चल रहा है। रैपिड किट जांच में तमाम मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो रही है। स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट वालों की डेंगू के रूप में पुष्टि कर रहा है।
ऐसे में डॉक्टर एलाइजा टेस्ट कराने और रिपोर्ट के इंतजार करने की बजाय मरीज को तत्काल उपचार देने में लगे हैं। ऐसी स्थिति में अन्य मरीजों को डेंगू व मलेरिया आदि से बचाव की सलाह दी जा रही है। हैरानी की बात ये है कि डेंगू से इन्कार कर कर रहे स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी भी जारी कर दी है।