गोंडा के कटरा बाजार में डायरिया के बचाव के उपाय बताते बीएमसी मनीष जायसवाल।
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गोंडा। बदलते मौसम में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग दस्त नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम चलाकर जिले के करीब पांच लाख घरों में ओआरएस का पैकेट पहुंचाएगा। इस अभियान के तहत आशा बहू व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को डायरिया व अन्य संचारी रोगों के प्रति जागरूक बना रहे हैं।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ जय गोविंद के अनुसार, दस्त के कारण से मृत्यु नहीं होती बल्कि दस्त के दौरान शरीर में होने वाली पानी की कमी मौत का कारण बनती है। यह मरीज को पूरी तरह कमजोर बना देता है, विशेष रूप से बच्चों के मामले में, दस्त शरीर के तरल पदार्थ और सूक्ष्म पोषक तत्वों को कम करके जटिलता का कारण बन सकता है।
दस्त से प्रभावित बच्चे को ओआरएस से साथ-साथ जिंक की गोलियां व पर्याप्त पोषण देने की जरूरत है। ओआरएस की पैकेट गांव की आशा कार्यकर्ता के पास मुफ्त में उपलब्ध है। इसके अलावा दस्त के दौरान बच्चे को स्तनपान कराना सबसे बेहतर उपाय है, जिससे बच्चें को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते रहते हैं और संक्रमण का खतरा भी कम होता है।
ओआरएस के पैकेट को एक लीटर पानी में घोल बनाना चाहिए। बच्चे को दस्त शुरू होते ही प्रत्येक दस्त के बाद यह घोल पिलाना चाहिए साथ ही जिंक की गोली एक चम्मच पीने के पानी या मां के दूध के साथ 14 दिनों तक देनी होती है। दस्त के दौरान मां का दूध और ऊपरी आहार (पूरक आहार) बंद नहीं करना है। बच्चों का खाना पकाने, खिलाने एवं मल साफ करने के बाद हाथों को साबुन पानी से अवश्य धोना चाहिए।