गोंडा। जिले में पंचायत भवनों से होने वाले कार्यों के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पंचायत गेटवे पोर्टल के नियमों का पालन न करने के आरोप में छपिया और परसपुर ब्लॉक की 15 ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवों को जिला पंचायतीराज अधिकारी ने नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन सचिवों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, सभी ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना ई पंचायत स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जाती है। इसके बाद संबंधित कार्यों का भुगतान पंचायत भवन से पंचायत गेटवे पोर्टल से किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, जांच में खुलासा हुआ है कि छपिया ब्लॉक की तीन और परसपुर की 12 पंचायतों में इस नियम का उल्लंघन किया गया है। यह अनियमितता एक दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच हुई है, जिसमें कुल 15 पंचायतों में भुगतान प्रणाली के साथ छेड़छाड़ की गई है। शासन स्तर के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ सचिवों ने नियमों का पालन नहीं किया। उन्हें संबंधित पंचायत भवन से ही कार्यों का भुगतान करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे सचिवों को चिह्नित करके कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। तीन दिन के भीतर सचिवों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।
इन सचिवों को जारी हुआ नोटिस
छपिया ब्लॉक के बनकटवा के सचिव पवन कुमार, इटैलाखुर्द के दिनेश कुमार प्रजापति और महराजग्रंट के सचिव विजय कुमार गौतम। परसपुर ब्लॉक से मधईपुर कुर्मी व परसपुर के सचिव जितेंद्र गुप्ता, पूरे लाली व चरहुआं के सचिव मनीष त्रिपाठी, बसंतपुर आंटा व दुबाई के उर्मिलेंद्र विक्रम तिवारी, चंगेरी के सत्यप्रकाश यादव, मोहना व धमर्रैया के सचिव सुनील कुमार राम और अकोहरी, भौरीगंज व शिवगढ़ के सचिव विजय प्रकाश सिंह।
प्रमाणपत्र जारी करने में भी लापरवाही
भुगतान संबंधी अनियमितताओं के अलावा पंचायतों में प्रमाणपत्र जारी करने में भी लापरवाही देखी जा रही है। अधिकारियों के कड़े निर्देशों के बावजूद कई पंचायतों से प्रमाणपत्र जारी नहीं हो रहे हैं। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि 100 ग्राम पंचायतों के पास प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आईडी ही नहीं है। वहीं, 214 पंचायतों के पास आईडी होने के बावजूद एक भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। 443 ग्राम पंचायतों में अब तक 10 से भी कम प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।